आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : ज्वार के औषधीय गुण
ज्वार का आटा पानी में घोलकर शरीर में लेप करने से शरीर की जलन दूर हो जाती है. ज्वार के आटे को पानी में मिलाकर रात में उबाल लिया जाए और अँधेरी जगह में रख दिया जाये सुबह इसमें जीरा और छाछ मिला देएसीडीटी में काफी फायदा होता है| भुनी हुई ज्वार को खाने से पेट में जलन कम होती है. जिन महिलाओ को मासिक धरम के विकार होते है उन्हें ज्वार के भुट्टे को जलाकर छान ले और उसकी राख के संग्रहित कर ले | इसकी 3 ग्राम मात्रा रोज सुबह खाली पेट मासिक धरम चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले लेना शुरू करें और जब मासिक धरम शुरू हो जाये तो इसका सेवन बंद कर दे. ऐसा करने से मासिक धरम के सभी विकार नष्ट हो जाते है ज्वार की रोटी को प्रतिदिन छाछ में डुबोकर खाने से जिन्हें अधिक प्यास लगती है, वह सुबह से बंद हो जाती है. ऊँचे पहाड़ो पर चढाई करने से पहले वनवासी अक्सर ज्वार की रोटी और छाछ का सेवन करते है. पीलिया रोग होने पर वनवासी इसके बीजो को उबालकर रोगी को इसका पानी देते है| माना जाता है कि ये पीलिया के दुष्प्रभावो को कम करता है और साथ में हिपेटाईटिस रोग में भी बेहतरी से काम करता है. दीपक आचार्य@9824050784
Posted on: Jan 27, 2017. Tags: Deepak Acharya SONG VICTIMS REGISTER
कहाँ तेह भूले रे गोंडी धरम ला तेह छोडके...गोंडी धर्म गीत
ग्राम-बाजरा, पोस्ट-पशुपतिपुर, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर, (छत्तीसगढ़) से सुभाग राज सेवा गोंडी धर्म के बारे के एक गीत सुना रहे है:
कहाँ तेह भूले रे गोंडी धरम ला तेह छोडके-
एकर का रहे गलती नहीं असली-
अपन धरम से रहली मुहं मोड़ के-
बुल करे फिर रिवाज ला हाँ-
देखले कर्म मोरो आज ला...
Posted on: Jan 27, 2017. Tags: SONG SUBHAGRAJ SEVA VICTIMS REGISTER
जागो गोंडवाना के जवानों सोने का अब वक्त नहीं, जो गोंडवाना के काम न आए वो गोंडवाना का रक्त नहीं...
जागो गोंडवाना के जवानों सोने का अब वक्त नहीं, जो गोंडवाना के काम न आए वो गोंडवाना का रक्त नहीं। गोंडवाना लैंड के रहवइया आदिवासी कहवैया। ग्राम-बरपटिया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से धनसाय मरावी बता रहे हैं कि समाज हम लोगो को क्या नहीं देता है. वे छत्तीसगढ़िया भाषा में बता रहे हैं अपन समाज अपन ला जीवन देइस, समाज अपन अंग ला दूध अपन ला पिलाईस, गोदी माँ सुलाइस, ठण्ड धूप से बचाईस, हाथ पकड़कर चलना सिखाइस, और बड़े होने पर रोटी और बेटी देइस, पढ़ाइस लिखाइस तो ओखर बाद इतना सब पढ़ लिख के हम अगर समाज ला काम नहीं आए तो इस जन्म का क्या अर्थ है? हम मूलनिवासी हैं पर कमज़ोर क्यों है यह सोचना है. धनसाय मरावी@7694867194
Posted on: Jan 27, 2017. Tags: DHAN SAI MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव में ५ किलोमीटर तक पक्की सड़क नहीं है कोई बीमार पड़ जाए तो एम्बुलेंस नहीं आ सकती
ग्राम-छदाना, ब्लॉक-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से गंगाराम सिंह बता रहे है कि कल उनके गाँव के लोग इकट्ठा हुए और उसमे यह बात निकलकर आई है कि इनके गाँव से मुख्य मार्ग की दूरी 5 किलोमीटर है जिसमे कच्चा रोड है जिसके कारण गाँव के लोगो को आने जाने में बहुत दिक्कत हो रही है और गाँव में कोई बीमार पड़ जाते है तो अम्बुलेंस गाँव तक नहीं आ पाती है तो इनका कहना कि इनके गाँव को मुख्य मार्ग से जोड़ा जाये जिसे मुख्यमंत्री सडक योजना कहते है. वे सीजीनेट सुनने वाले साथियों से अनुरोध कर रहे हैं कि आप कृपया जिले के कलेक्टर@9425903973 से बात कर गाँव के २००० लोगों को मदद करने का अनुरोध करें. गंगाराम@7049573056.
Posted on: Jan 27, 2017. Tags: GANGARAM SINGH SONG VICTIMS REGISTER
उल्लू का दहेज़ : कहानी...
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार उल्लू का दहेज़ शीर्षक से एक कहानी सुना रहे हैं. बहुत समय पहले की बात है चन्गेज खान अपने फौज के साथ डेरा डाले रात काट रहे थे. वहां एक बहुत बड़ा पेड़ था पेड़ के ऊपर कुछ उल्लू बैठे बाते कर रहे थे.चन्गेज खान ने अपने वजीर से पूछा तू तो पक्षियों की बोली समझता है बता ये क्या बाते कर रहे हैं. वजीर ने कहा खान साहब इन उल्लू में से एक उल्लू दूसरे जंगल का है वो अपनी बेटी का रिश्ता करने आया है और दहेज़ की बात चल रही हैं. उल्लू दहेज़ में उधार मांगते है. बेटी वाला उल्लू बोल रहा है कि चन्गेज के होते हुए दहेज़ की चिंता मत करो जितना उधार मांगते हो मिल जाएगा, वजीर की बात को सुनकर के च न्गेज खान को बहुत दुःख हुआ. सुनील@9308571702
