बच्चे खेल रहे हैं, दीन दुनिया से बेखबर से...कविता

विकासखंड बर्गी, जिला जबलपुर (मध्यप्रदेश) से मोहम्मद परवेज़ खान एक कविता सुना रहे हैं, जिसका शीर्षक हैं- बच्चे खेल रहे हैं:
बच्चे खेल रहे हैं, दीन दुनिया से बेखबर से-
इनके खेल में शामिल हैं-चिड़िया और कल-कल करते पंछी-
नदिया और पहाड़ भी, मंदिर और मस्ज़िद भी-
धूल में सने, मिट्टी में लिपटे चीखते चिल्लाते बच्चे खेल रहे हैं, कितने बेखबर से-
इनके खेल में शामिल हैं, धरती और आकाश भी चन्द्रमा और सूरज भी-
ये नहीं जानते अदावत, बदला और दुश्मनी-
क्यों ना हम भी शामिल हो जाए इसके खेल में-
और खेले सिर्फ मस्ती और उल्लास का खेल...

Posted on: Jun 07, 2017. Tags: Parvez Khan SONG VICTIMS REGISTER

बेहद चन्दा गन्दा है, लड़का सचमुच गन्दा...बाल कविता-

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया कविता सुना रहे हैं :
बेहद चन्दा गन्दा है,लड़का सचमुच गन्दा-
हँसता है तो ऐसे जैसे आसमान का चंदा है-
रोता है तो ऐसे जैसे और नहीं कुछ धंधा है-
चुप करने की हर कोशिश पर देता फेर वो रमदा है-
वैसे तो आजकल सभी का वक्त चल रहा मंदा है-
इसके कारण नाना जी का चौपट सारा धंधा है...

Posted on: Jun 07, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER

बदली जा गंउवा के, खाका बलम तोला एकता बना के हो...भोजपुरी गीत -

जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से अर्जुन साहनी भोजपुरी भाषा में एक जनवादी गीत सुना रहे हैं :
बदली जा गंउवा के, खाका बलम तोला एकता बना के हो-
खुरपी और हंसुआ से कईली बियारी-
जिंदगी भर सुनली मलिकवा के गारी-
तब ले बनेच मोहता का बालम-
ना चाही हमरा के कोठा अटारी-
ना चाही मखमल के सिलकन के साड़ी...

Posted on: Jun 07, 2017. Tags: ARJUN SAHANI SONG VICTIMS REGISTER

सह सह के काबर मर बोगा, एखर ला बने लड़ाई हे...छत्तीसगढी संघर्ष गीत -

नरेश बुनकर जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से एक छत्तीसगढी संघर्ष गीत सुना रहे है जो साथियों को अपनी समस्याओं को हल करने के लिए चुपचाप सहने की बजाय संघर्ष करने के लिए प्रेरित कर रहा है :
सह सह के का बर मर बोगा, एखर ला बने लड़ाई हे-
एक सुन्था के रस्ते मा चलबो, तभी तो हमर भलाई हे-
कतको मेहनत करथन तबले, नही पावन हम सुख ला गा-
भूख दरिद्री बढ़त हवेव, कैसे झेले दुःख ला गा-
सुन्ता के सरग्नी, सैनी में चढबो, तभी तो हमर भलाई हो...

Posted on: Jun 07, 2017. Tags: NARESH BUNKAR SONG VICTIMS REGISTER

क क रे आवहे रे, तील चोह बुकारा काह करा आवहे रे...दमकच गीत

ग्राम-देवरी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छतीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया सरगुजिहा भाषा में एक दमकच गीत सुना रहे है :
क क रे आवहे रे, तील चोह बुकारा काह करा आवहे रे-
तील चोह बुकारा कहा, कहा आवो रे संगी आवो रे बारा-
माहेर माहेल ऐ जारे चोला, आवले बाराती नी रे आवले बारात-
क क रे आवहे रे, तील चोह बुकारा काह करा आवहे रे...

Posted on: Jun 07, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER

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