मैनपाट सरगुजा छत्तीसगढ़ में एक अच्छा दर्शनीय स्थल है, आप सभी यहां घूमने आइये, स्वागत है...
ग्राम-बरिमा, ब्लाक-मैनपाट, जिला-सरगुजा (छतीसगढ़) से दीपक बागरी स्थानीय निवासी लक्ष्मी मुड़ी से वहां के दर्शनीय स्थल मैनपाट के विषय में जानकारी ले रहे है, वे बता रहे हैं कि मैनपाट एक आदिवासी बहुल जगह है जहां मेहता प्वाइंट, टाइगर प्वाइंट, मछली प्वाइंट और दलदली अलग-अलग दर्शनीय जगह है जिसमे दलदली ऐसी जगह है जहां खुबसूरत बाग, काली माता का मंदिर है और आप कर्मा नृत्य तथा और भी आदिवासी संस्कृति का नज़ारा देख सकते हैं. यहां का मौसम बहुत सुहाना है. ठण्ड में बहुत सर्दी हो जाती है. दलदली में जब आप उछलो कूदो तो लगता है कि धरती भी आपके साथ डोल रही है. वे सभी श्रोताओं को मैनपाट आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं | दीपक@895941793
Posted on: Sep 20, 2017. Tags: DEEPAK BAGRI SONG VICTIMS REGISTER
हाय रे हाय रे सुनील भाई अइसन गाना सुनाई...जस्पुरिया गीत -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक जस्पुरिया गीत सुना रहे हैं:
हाय रे हाय रे सुनील भाई अइसन गाना सुनाई-
हल्ला-हल गावे सुखलाल धरे-धीरे ढोलक बजाई-
शाय हरमुनिया रसाई अपना गाना सुनाई-
अरे अपना गाना सुनाई अरे सुनील भाई...
Posted on: Sep 19, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
दिल को बहला ले, इज़ाज़त है, मगर इतना न उड़...गज़ल -
ग्राम-रक्शा, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से उषा सिंह एक गज़ल सुना रही है:
दिल को बहला ले, इज़ाज़त है, मगर इतना न उड़-
आज सपने देख, लेकिन इस कदर सितारे ना देख-
सिर से सिने में कभी, पेट से पांव में कभी-
एक जगह हो तो कहे, दर्द इधर होता है-
जब किसी हताश व्यक्ति से, मिलन हो जाता है तो-
ऐसा लगता है की जीवन में, सफल होना संभव नही...
Posted on: Sep 19, 2017. Tags: SONG USHA SINGH VICTIMS REGISTER
सरई के बीज को महुआ के साथ मिलाकर खा सकते हैं, पेट भी भरता है, यह हमें स्वस्थ भी रखता है...
ग्राम-उमरखोही, विकासखण्ड-गोरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में धनसाय मरावी के साथ में गाँव की महिलाये शुकवरिया और सूरज कुवर है जो सरई के पेड़ के फल का भोजन के रूप में उपयोग के बारे में चर्चा कर रहे हैं वे बता रही हैं कि इसके फल को उबालकर 4 से 5 बार उसके पानी को निकाल लेना होता है इसके पकने के बाद इसको महुआ के साथ भुन लिया जाता है उसके बाद दोनों को मिलाकर खाते है ये स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है और जिस जगह में खाने की समस्या है वे इसी का उपयोग करते है साथ ही इसका तेल भी निकलता है जो घाव को ठीक करने में काम आता है इसका औषधीय महत्व भी है | पहले हमारे पूर्वज यही सब खाते थे हमें रासायनिक खाद से बने भोजन को छोड़ जड़ी-बूटियों की ओर लौटना होगा।
Posted on: Sep 19, 2017. Tags: DHAN SAI MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
ये वन में मन के दवाई, बुजर्ग सियान मन ला पूछा रे भाई...वन्य औषधि गीत -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया वन्य औषधियो पर एक गीत सुना रहे हैं :
ये वन में मन के दवाई-
बुजर्ग सियान मन ला पूछा रे भाई-`
जंगल हर कटत यह घरे अब लगाई-
सब दीदी दाई मिल के जंगल ला बचाई-
सब दीदी भैया मिल के जंगल ला बचाई-
जंगल में मन के दवाई...

