लंका मा मचे है लड़ाई आवाज आवय बंधो मा रे...गीत
ग्राम-पंडरीपानी, विकासखंड-गोरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से सुनीता धुर्वे एक गीत सुना रहे हैं :
लंका मा मचे है लड़ाई आवाज आवय बंधो मा रे-
कई लाख तोप चले हैं कई लाख जंजीर गा कई लाख जंजीर-
कई लाख तलवार चले है लंका मा यार आवाज आवय बंधो मा रे-
एक लाख तोप चले हैं दुई लाख जंजीर गा कैलाख जंजीर-
तीन लाख तलवार चलय लंका मा राम आवाज आवय बंधो मा रे...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG SUNITA DHURWE VICTIMS REGISTER
एक दिन मटिया में सभही के सिंगार होई, जब पिजड़ा से पंछी फरार होई...लोकगीत-
ग्राम बभनतलाव पोस्ट, थाना तहसील, जिला-रोहतास( बिहार) से सुरेंद्र उरांव एक लोकगीत सुना रहे है:-
अरे एक दिन मटिया में सभही के सिंगार होई-
जब पिजड़ा से पंछी फरार होई, जब पिजड़ा से पंछी फरार होई-
नाती नातेदार काम नही अएहे, नाती नातेदार काम नही अएहे-
गाँव के लोगवा सब खडी रही जयेहें, गाँव के लोगवा सब खडी रही जयेहें-
हो केवल भाई भततीजे सबका हार होई, हो केवल भाई भततीजे सबका हार होई-
जब पिजड़ा से पंछी फरार होई, जब पिजड़ा से पंछी फरार होई...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG SURENDRA ORAON VICTIMS REGISTER
बचना नीचे से कोयल निकरी गोठ, कावा पाले उसके अंडे वह मस्ती में डोले...बाल कविता
ग्राम-त्रिकुंदा से मंगेश यादव एक बाल कविता सुना रहे है-
बचना नीचे से कोयल निकरी गोठ-
कावा पाले उसके अंडे वह मस्ती में डोले-
मानव राम-राम अंधे चादर-
पानी है धूनी रे माई सीष बिचारी-
मछली बगुले मोर उड़ाई-
गिर गिट रंग बदले अपना देह-
फूल के पास झट पकडे उन्हें...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: MANGESH YADAV SONG VICTIMS REGISTER
महुआ से बनाये स्वादिष्ट पकवान...
ग्राम-गुम्माटोला, ब्लाक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से बाबूलाल नेटी के साथ में कमल सिंह धुर्वे है जो महुआ के बारे में बता रहे है कि महुआ से शराब बनाने के अलावा अच्छे-अच्छे पकवान भी बना सकते हैं आदिवासी अधिकतर इसका उपयोग बरसात के मौसम में इसको भून कर खाने में करते हैं इसके अलावा वे इसका लाटा भी बनाते हैं और इसके साथ चना, इमली आदि मिलकर वे इसे बड़े चाव से खाते हैं, इसके अलावा वे इसका फरा भी बनाते है जिस प्रकार जलेबी बनाते हैं उसी प्रकार यह बनाते हैं इसके बाद जब वर्षा ऋतु में पहली अमावस्या आती है तो पूजा में महुए का ही उपयोग होता है इसके साथ में वे नारियल और शराब का भी प्रयोग पूजा में करते हैं| बाबूलाल नेटी@479003198.
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER
सास बहू की कहानी...
ग्राम-रक्षा, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से उषा सिंह उईके एक कहानी सुना रही हैं:
किसी गांव में सास और बहू रहते थे एक दिन सास ने कहा मै तीर्थ जा रही हूँ, जो दूध दही होता है उसे बेच कर पैसा एकत्र कर लेना इसके बाद वो चली गई, चैत्र वैशाख का महीना था उनकी बहू सारा दूध दही पीपल, तुलसी के पेढ पर डाल देती और खाली बर्तन ला कर रख देती, तीर्थ करने के बाद जब सास वापस आई तो पैसे मांगी तो बहू ने सारा दूध पीपल पर डालने की बात बता दी इस पर सास ने कहा जैसा भी हो मुझे पैसे चाहिए, तब बहू पीपल और तुलसी के पास जाकर बैठ गई कहा कि मेरी सास मुझे दूध दही के पैसे मांग रही है मुझे पैसे दो तब पीपल कहता है बेटी हमारे पास पैसे नही है, कंकड़ पत्थर है इन्हें ले जा वह उठा कर अपने घर ले आई जब सुबह सास ने पूछा पैसे दो तो बहू ने अपना कमरा खोला तो देखा कि हीरे मोतीयों से पूरा कमरा जगमगा उठा बहू ने कहा ले लो अपने पैसे, यह देखकर सास के मन में भी लालच आया और वह भी बहू के जैसे ही रोज़ दूध दही पीपल और तुलसी में डालने लगी और बदले में एक दिन बहू जैसे पैसे मांगने लगी पर उसे कुछ नहीं मिला इस कहानी से यह संदेश जाता है कि लालच नही करना चाहिए-
