हमे बताया जा रहा है कि हम कितने महत्वपूर्ण हैं...
हमे बताया जा रहा है
कि हम कितने महत्वपूर्ण हैं
कि हमारी एक ऊँगली के दबाव से
बदल सकती है उनकी किस्मत
कि हमें ही लिखनी है किस्मत उनकी
इसका मतलब हम भगवान् हो गए.....
वे बड़ी उम्मीदें लेकर आते हैं हमारे पास
उनके चेहरे पर दीनता तैरती है
जैसे एक नया भिखारी सकुचाता है
शर्माता है
गिडगिडाता है
मायूस, मासूम, मजबूर दिखने का
सफल अभिनय करता है
हम उनके फरेब को समझते हैं
और एक दिन उनकी झोली में
डाल आते हैं...
एक अदद वोट.....
फिर उसके बाद
भक्त अपने भगवानों को भूल जाते हैं....
Posted on: Nov 16, 2013. Tags: Anwar Suhail
Allegation of corruption in toilet construction under Sarva Shiksha Abhiyan...
Sarfaraz Anwar from Ramchandrapur block in Balrampur district is telling us that Govt has given Rs 50,000 to teachers in Sarva Shiksha Abhiyan for construction of toilets in schools. But in this block the teachers have repaired some old toilets and painted them new. The schools which have built new toilets have not followed the Govt specification. The local officials tell that district officials have orally told them to make the toilets according to their wish. For more Anwar Ji can be reached at 09406159482
Posted on: Dec 28, 2012. Tags: Sarfaraz Anwar
बंटे हुए घर की तस्वीर...रजत कृष्ण की एक कविता
इस साझे घर की दीवारें
हिलने डुलने लगीं हैं अब
अक्सर टकरा उठते हैं आपस में
छोटे बड़े बर्तन सभी
और बंद हों जाते हैं
दरवाजे खिडकियाँ
टकराहट शुरू होती है
और खाली तसले सा कांपने लगता है
८० वर्षीय बाबा का तन बदन
अब रतियाँ सुनाई पडती हैं
देव खोली में सिसकियाँ
पुरखों यह कुटुम्ब जो जुड़ा रहा आपस में मया के तागे से
यह मेरी साँसों तन
राहट में गूंजता है
अंतरनाद दादी का
जनम से साझेपन को जीता आया
एक कवि ने कई रातों के नींद का बोझ लिए
बंटे हुए घरों की बस्ती में भटक रहा है
Posted on: Oct 06, 2012. Tags: Anwar Suhail
भारतीय किसान के जीवन पर रजत कृष्ण की दो कवितायेँ
सुकाल में
इस बरस बारिश अच्छी हुई
माहो कटवा की मार से भी बची हुई है फसल
खडी फसल देख मेड पर बैठा जगतू सोच रहा है
बेटी का हाथ पीला कर देगा इस रामनवमी में
फसल कटी, खलिहान पहुँची
मिसाई हुई, अन्न माता घर आई
और दौड़े आया महाजन पीछे पीछे
मिली नोटिस बैक की
दो साल के नाहर नाले टैक्स की
याद दिलाने घर आया अमीन पटवारी भी
जगतू ने महाजन का पाई पाई चुकाया
चुकता किया बैंक का ऋण
भरा नहर नाले का टैक्स भी
इस तरह से जैसे जगतू ने जैसे गंगा नहाया
रही बात बेटी की
तो जगतू ने बड़े धूम धाम से
नियत समय पर किया उसका ब्याह
दामाद को दी उसके पसंद की टीवी और हीरो साइकल
ठीक ठाक की बारातियों की आव भगत
गोत्र जनों को जमाया भरपूर कलेवा
हां इसा बीच हमारे गांव के दुःख में जुड गया एक और दुःख
कि जगतू राम वल्ड भुखऊ कलार भी
जा खडा हुआ उनमें
जो रहे सहे खेत बेचकर
उस सुकाल में भी
हों गए भूमिहीन खेतिहर
अनुपस्थिति में फ़ैली उपस्थिति
तुम्हारे अनुपस्थिति के दिनों में मैं तुम्हारी उपस्थिति को ढंग से महासूस कर रहा हूं
जैसे महसूस करता है किसान
पक्की फसल में मिट्टी की उपस्थिति को
हवा पानी और धुप की उपस्थिति को
तुम मेरे हिस्से का धुप
हवा पानी धुप हों
और मिट्टी भी
तुमसे पक रही है फसल मेरे जीवन की
Posted on: Sep 28, 2012. Tags: Anwar Suhail
छत्तीस जनों वाला घर...रजत कृष्ण की एक कविता
छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जनपद
बागबहरा में छत्तीस जनों वाला एक घर है
जहां से मैं आता हूं कविता के इस देश में
छत्तीस जनों वाला हमारा घर
९० वर्षीया दादी की सांसों से लेकर
डेढ़ वर्षीय खुशी की आँखों में बसता और खुश होता है
यहाँ आने जाने को एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार दरवाजे हैं
और घर का एक छोर एक रास्ते पर
तो दूसरा दूसरे रास्ते पर खुलता है
घर के दाएँ बाजू पर रिखीराम का घर है
तो बाएँ में फगनूराम का
रिखी और फगनू हमारे कुछ नहीं
पर एक से जीजा का रिश्ता जुड़ा, तो दूसरे से काका का
घर के ठीक सामने गौरा, चौरा और पीपल का पेड़ है
जो मेहमानों को हमारे घर का ठीक ठीक पता देते हैं
यही, हां यही घर है मोहनराम साहू का, सावित्री देवी का
मोहित, शैलेश, अश्वनी, धरम, भूषण, महेश, रामसिंह, रामू और रजत कृष्ण का
आँगन में तुलसी और तुलसी के बाजू में छाता
छाता के बाजू में विराजता है बड़ा सा सिलबट्टा
जो दीदी भैया की शादी का स्वाद तो चखा ही
चखा रहा है अब स्वाद भांजी मधु और भतीजी मेधा की मेहंदी का
आँगन के बीच में एक कुआं है
और कुआं है बाडी में
बाडी से लगा है कोठा
कोठा से जुड़ा है खलिहान
जहां पर कार्तिक में खेत से आता है धान
और लिपि पुती कोठी गुनगुना उठती है
स्वागत है आओ नवान्न स्वागत है
आओ नवान्न स्वागत है...
रजत कृष्ण
