भारतीय किसान के जीवन पर रजत कृष्ण की दो कवितायेँ
सुकाल में
इस बरस बारिश अच्छी हुई
माहो कटवा की मार से भी बची हुई है फसल
खडी फसल देख मेड पर बैठा जगतू सोच रहा है
बेटी का हाथ पीला कर देगा इस रामनवमी में
फसल कटी, खलिहान पहुँची
मिसाई हुई, अन्न माता घर आई
और दौड़े आया महाजन पीछे पीछे
मिली नोटिस बैक की
दो साल के नाहर नाले टैक्स की
याद दिलाने घर आया अमीन पटवारी भी
जगतू ने महाजन का पाई पाई चुकाया
चुकता किया बैंक का ऋण
भरा नहर नाले का टैक्स भी
इस तरह से जैसे जगतू ने जैसे गंगा नहाया
रही बात बेटी की
तो जगतू ने बड़े धूम धाम से
नियत समय पर किया उसका ब्याह
दामाद को दी उसके पसंद की टीवी और हीरो साइकल
ठीक ठाक की बारातियों की आव भगत
गोत्र जनों को जमाया भरपूर कलेवा
हां इसा बीच हमारे गांव के दुःख में जुड गया एक और दुःख
कि जगतू राम वल्ड भुखऊ कलार भी
जा खडा हुआ उनमें
जो रहे सहे खेत बेचकर
उस सुकाल में भी
हों गए भूमिहीन खेतिहर
अनुपस्थिति में फ़ैली उपस्थिति
तुम्हारे अनुपस्थिति के दिनों में मैं तुम्हारी उपस्थिति को ढंग से महासूस कर रहा हूं
जैसे महसूस करता है किसान
पक्की फसल में मिट्टी की उपस्थिति को
हवा पानी और धुप की उपस्थिति को
तुम मेरे हिस्से का धुप
हवा पानी धुप हों
और मिट्टी भी
तुमसे पक रही है फसल मेरे जीवन की
