अब देश को बेटियां कितनी खटकती है...कविता

ऋषभ मिश्र ग्राम-ओझापुरवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं:
दृश्य ऐसा देखकर सांसे लटकती है-
फल नही अब पेड़ पर लाशें लटकती हैं-
वासना की ये सुनामी चीखकर कहती है-
सभ्यताएं रस्ते कैसे भटकती है-
मान-मर्यादा सुरक्षा प्यार सब गायब-
अब देश को बेटियां कितनी खटकती है-
चीख आंसू, जुल्म शोषण जातियां,ब्याह – आज आँगन में मटकती हैं-
आज तक पिघला नहीं है-
दिल दुआओं का चाहते-
चाहते कितना चरण सिर पटकती है-
सिर्फ आधी रात को माँ ही बताएगी-
बाप की ये हड्डियाँ कैसे चटकती हैं-
बादलों की आँख में जब शर्म दिखती है-
तब कहीं इस खेत में खुशियाँ फटकती हैं-
दौलत से सांस दंदे पेट भरती है-
गोलियां सल्फास की-
बहुएं गटकती हैं-
वक्त बदला है अभी तुम देखते जाओ-
दूर घड़ियाँ हाथ से क्या-क्या झटकती हैं...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: Rishabh Mishra SONG VICTIMS REGISTER

कहां के पहुना कहां चली आया हाय रे कहां के पहुना...डोमकच गीत -

ग्राम-बरपटिया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रामचरन जगत, राम सुभाष चटर्जी, सुखराम आयाम एक पारंपरिक डोमकच गीत सुना रहे हैं :
कहां के पहुना कहां चली आया हाय रे कहां के पहुना – कहां चली आया रे कहां जग लोलो हमर गोडो ला धोवाय – खेला-खेला भले ले ले गोडो ला धोवाय लेरे गोडो ला धोवाय – गोविदपुर कर पहुना बरा पाटिया आया हाय रे गोविदपुर के पहुना – पारा पाटिया रे माझे खोर लोलो हमर गोडो ला धोवाय – खेला-खेला भले ले ले गोडो ला धोवाय लेरे गोडो ला धोवाय...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: DHANSAY MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

कागज के ये नोट है बाबू कागज के ही नोट...गीत -

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं :
कागज के ये नोट है बाबू कागज के ही नोट – कागज की ये माया इनके नियत में है खोट जी – चले गाँव की ओर जी – अजी सांचे के ये रंग अनेक जी सांचे के ही ढंग – अरे बाबू जैसी करनी वैसी भरनी चले शहर की ओर...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER

सीखकर अपनी दुकान खुद बना रहा हूँ, बड़े घर भी बना सकता हूँ, ऐसा और युवा भी कर सकते हैं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-अमोड़ी, विकासखंड-अंतागढ़, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी गाँव के युवा दुर्गाप्रसाद सलाम से बात कर रहे हैं जो बता रहे हैं कि उन्होंने अलग-अलग जगहों में काम कर कारीगरी सीखी और बिना किसी कारीगर की मदद से अपना दुकान बना रहे हैं. वे कह रहे हैं कि बगैर किसी बाहरी मदद के वे ऐसे ही और बड़े घर भी बना सकते हैं आगे अगर ज़रुरत पड़े. गांव में 300 की जनसंख्या है दुकान के लिए दुर्गुकोंदल से सामान लाते है स्वयं अपनी पूंजी लगाकर रोजगार कर आज के युवाओ को आत्मनिर्भर होने का संदेश दे रहे हैं इस प्रकार से हम देश की बढ़ती बरोजगारी को कम कर सकते हैं | बाबूलाल नेटी@9713997981

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER

निमय अमोल निमय बाबोल...गोंडी गीत -

ग्राम-आमापारा सिवनी, पोस्ट-रायगोटिया, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से जयबती मतलामी एक गोंडी गीत सुना रही है:
निमय अमोल निमय बाबोल-
निमय बापी निमय तादों-
मातल जंगो पेन लिंगो-
अकाल बुध गुरु ज्ञान-
गुरून मेवा वायो ज्ञान...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: JAIBATI MATLAMI SONG VICTIMS REGISTER

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