हम तो तोरे जेसा ना ही देखा येसा...गजल-
जिला-मुंगेर बिहार से दीपक कुमार एक गजल सुना रहें है:
हम तो तोरे जेसा ना ही देखा येसा-
देहियाँ सहारा गजब कुर्ती-
बड़ा जली दार बा तुहार कुर्ती-
सारे जहा से मेने देखा गया हूँ गली गली-
भौरा तो डिम डिम जायें जाके बिच कलियाँ में-
तेरी आखोँ में नशा तेरी बातों में नशा-
हम तो तोरे जेसा ना ही देखा येसा...(182542) GT
Posted on: Dec 11, 2020. Tags: CG SONG SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : सिकल सेल का घरेलू उपचार-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गाँधी सिकल सेल का घरेलू उपचार बता रहें है, बबूल का ताजे फूल को रात को एक गिलास पानी में 50 ग्राम, डाले उठने के बाद इन फूलों को मसल कर उसे छान कर और उसमे मिश्री मिला कर पिने से लाभ हो सकता है | परहेज़- ठण्डी से बचे, मिर्च, मसाला, तेल, खटाई का उपयोग कम करें, नशा न करें, संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं: संपर्क नंबर@7879751110. (182497) GT
Posted on: Dec 11, 2020. Tags: HEALTH DEPARTMENT SONG VICTIMS REGISTER
पिहू-पिहू पपीहा बोले कुहू-कुहू कोयलिया हाय...दादरिया गीत-
ग्राम-डोटमा, ब्लाक-जयजयपुर, जिला-जांजगीर चापा छत्तीसगढ़ से सम्पतलाल यादव एक दादरिया गीत सुना रहें है:
पिहू-पिहू पपीहा बोले कुहू-कुहू कोयलिया हाय-
मोर मन के सुवा उड़ायें संगे तोर टूर में आयें-
तैहा मोला दे देते ना मोर मन के सुवा उड़ायें-
पिहू-पिहू पपीहा बोले कुहू-कुहू कोयलिया हाय-
कभी ना दुरे ते हस मोरे ना मोर संगी नई मिले-
पिहू-पिहू पपीहा बोले कुहू-कुहू कोयलिया हाय...(182590) GT
Posted on: Dec 11, 2020. Tags: CG SONG SONG VICTIMS REGISTER
हे शारदे माँ हे शारदे माँ अज्ञानता से हमें तार दे माँ...सरस्वती वंदना-
ग्राम-ढोडमा,ब्लाक-जयजयपुर,जिला-जांजगीर चापा,राज्य-छत्तीसगढ़ से नरेन्द्र यादव सरस्वती वंदना सुना रहे है:
हे शारदे माँ हे शारदे माँ-
अज्ञानता से हमें तार दे माँ-
तू स्वर देवी है संगीत तुझसे-
हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे-
हम है अकेले हम है अधूरे-
तेरी शरण में हमें प्यार दे माँ...(181896)RM
Posted on: Dec 11, 2020. Tags: SONG VICTIMS REGISTER
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे...भजन-
विकानेर, राजस्थान से नारायण एक भजन सुना रहें है:
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे-
उसका दुश्नम क्या करता रे जिसका राम रुकना रे-
उसका दुश्मन क्या कर सकता रे जिसका राम रुकना रे-
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे-
हिरणा कुशु पहलाद भगत का ज्ञान दुश्मन बन के-
ज्ञान बन के दुश्मन जन्नदो को सुख में दे दिया-
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे...(182618) GT
