मंजिल जहाँ वहीं रुकना है, सब कोई दिल में ठान लो...संघर्ष गीत
निकले हैं हम खुली सड़क पर, हक लेना है जान लो
मंजिल जहाँ वहीं रुकना है, सब कोई दिल में ठान लो
क्यों गरीब है सोचा भाई, इसमें भी आटा गीला है
गाँव-गरीब को लील रहे हैं, पूंजीवाद की लीला है
सारे जहाँ में एका करके, खोया हुआ सम्मान लो
मंजिल जहाँ वहीं रुकना है..........
रक्षक बन बैठे हैं भक्षक, चोरों की रखवाली है
जल-ज़मीन और जंगल लूटे, संस्कृति ये पाताली है
सारे जगत में ग़दर उठेगी, दुनिया का इतिहास लो
मंजिल जहाँ वहीं रुकना है...
पेट भरन को दाना चहिए, ये अभियान हमारा है
श्रम-पूंजी के द्वंद्व में भइया, तन-मन लुटा हमारा है
गांधी-बिनोवा-जयप्रकाश की राह में सब कोई जान लो
मंजिल जहाँ वहीं रुकना है, सब कोई दिल में ठान लो
Posted on: Jul 08, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER
चेतन रो जमाणों चेतन रो...राजस्थानी महिला सशक्तिकरण गीत
गोकरन सिंह वर्मा महिला सशक्तिकरण पर एक राजस्थानी गीत सुना रहे हैं , जिसका मूल तत्व यह है कि महिलाओं को एक होकर आगे बढ़ना होगा...
चेतन रो जमाणों चेतन रो
बहना चेत सको तो चेत
जमाणों आयो चेतन रो
डाबर-डूबर रोटी मांगे, धंधो कर लो परफी
प्रेम-एकता सभी बढ़ाओ, मिलके धंधो परफी
साहुल यारो साथ में तुम, साथ निभाओ परफी
बहना चेत सको तो चेत
जमाणों आयो, चेतन रो...
एक-दुई तो पहले चेती, कुछ नहीं फ़र्को आयो
दो-चार के चेतने से, कुछ झनकारो आयो
गांव-गांव की बहने चेती, धरती पलटी खायी
बहना चेत सको तो चेत
जमाणों आयो चेतन रो...
Posted on: Jun 22, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER
सीजीनेट की योजना निराली, लायेगी गांव में खुशहाली...
सीजीनेट की योजना निराली
लायेगी देश में खुशहाली
हाँ-हाँ लायेगी देश में खुशहाली
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई
आपस में सब भाई-भाई
बंद कर दो, कर दो संप्रदाय की लड़ाई
लायेगी देश में खुशहाली
ओ सीजीनेट की योज़ना निराली
लायेगी देश में खुशहाली
जाति-पाति को हम तोड़ेंगे, धर्म- भेद को सब छोड़ेंगे
बंद कर दो-कर दो संप्रदाय की लड़ाई
लायेगी देश में खुशहाली
सीजीनेट की योजना निराली
लायेगी गांव में खुशहाली
पर्यावरण है धर्म हमारा, पेड़ लगाना है कर्म हमारा
बंद कर दो... कर दो-कर दो पेड़ो की कटाई
लायेगी देश में खुशहाली
ओ लायेगी देश में खुशहाली
सीजीनेट की योजना निराली
लायेगी गांव में खुशहाली
हाँ-हाँ लायेगी गांव में खुशहाली
Posted on: Jun 21, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER
सीजीनेट के नंबर माँ हमन बोलबो संगी ना...छत्तीसगढ़ी गीत
साथी गोकरण सिंह वर्मा जी एक छत्तीसगढ़ी गीत गा रहे हैं. गीत गाँव के मजदूरों-किसानों के ऊपर है, जिनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है. वेकहते हैं सीजीनेट उनकी आवाज़ उठाने के लिए आया है. हम सब मिलकर कैसे गाँव को समस्या मुक्त बना सकते हैं, इसी सन्दर्भ में ये गीत है. गीत कर्मा की तर्ज पर है...
काबर मार डारे रे बैरी हमला
गरीबी भुखमरी माँ मार डारे
मनरेगा मा करे हन काम,पैसा मिलत नई ये
कउनो नेता भी हमार दुखड़ा, सुनत नई ए
ये सुनत नईयेगा मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
कबर मार डारे रे.......
गरीबा मजदूर साथीमन, सब आगे आवा
सीजीनेट कहत है संगी, अधिकार पावा
ये अधिकार पावेगा मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
काबर मार डारे.......
सीजीनेट के धरे हन, पाछू जी
एमा हमन बोलबो संगी रइबोगा, आगो जी
रइबोगा आगो जी बाबू, मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
कबर मार डारे रे.....
सीजीनेट के नंबर माँ हमन बोलबो संगी ना
अधिकारी कर्मचारी मनला सुनाबो संगी ना
ये सुनाबो ना, मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
काबर मार डारे रे.....
ये सीजीनेट कहाथेगा कहना मानो जी
औ कौन घूसखोरी करथे संगी, तेला पहिचानो संगी
तेला पहिचानोगा, मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा, मार डारे
कबर मार डारे रे बैरी हमला,
गरीबी भुखमरी मा, मार डारे.
काबर मार डारे रे.....
Posted on: Jun 19, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER
बेड़ा कइसे पार होहि रे, जिनगी के...एक छत्तीसगढ़ी गीत
साथी गोकरण सिंह वर्मा एक छत्तीसगढ़ी गीत गा रहे हैं. गीत का सन्दर्भ ये है कि आज समाज से अच्छे लोग गायब हो रहे हैं. ऐसे में समाज कैसे आगे बढेगा. अंतिम आदमी की सुध कौन लेगा, कौन इसे रास्ता दिखाएगा...
बेड़ा कइसे पार होहि रे, जिनगी के
बेड़ा कइसे पार होहि ना
नइया मझधार मा, नहीं है खेवइया
जेल पतवार संउपे, अपने देखइया
अउकोनो सवार होहि रे
बेड़ा कइसे.......
जाति-पाति, भाषा में, बंट गे सबो जन
बन गे हे भाई हा, भाई के दुश्मन
एमा कब सुधार होहि रे
बेड़ा कइसे........
संझा अउ बिहनिया चले गोली-आंधी
हँसत दुश्मन, रोवत गांधी
कइसे संसार होहि रे
बेड़ा कइसे........
सच के बोलइया हा हाट माँ बेचावत है
छल के करइया हा हवा में उड़ावत हे
कइसे उजियार होहि रे
बेड़ा कइसे.......
