गुरु बाबा हो करा न हमरा भव सागर सा पार...भजन-
जिला-पुर्णियां (बिहार) से भक्त प्रहलाद एक भजन सुना रहे हैं:
गुरु बाबा हो करा न हमरा भव सागर सा पार-
जगत अथाह भयंकर धारा-
बीते लहर मझधार-
गुरु बाबा हो करा न हमरा भव सागर सा पार... (AR)
Posted on: Dec 15, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER
वह रे मूर्खे मानव तय काबर दगा मा डाले...छत्तीसगढ़ी भजन-
जलेश कुमार मरकाम ग्राम-कर्मा, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से छत्तीसगढ़ी भजन सुना रहें है:
वह रे मूर्खे मानव तय काबर दगा मा डाले-
तोर भजन ला करहु छुप के गा जियत लबारी मारे-
राम भजन है सार जगत मा मुक्ति बना लो गा-
ये नार्त तन नई मिले दुबारा हरी गुण गालो गा-
का लेके आये जगत मा का लेके जाबे गा-
वह रे मूर्खे मानव तय काबर दगा मा डाले...(181733) GT
Posted on: Dec 15, 2020. Tags: CG SONG SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : मंदाग्नि, रोग का घरेलू उपचार-
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया छत्तीसगढ़ से वैद्य केदारनाथ पटेल उपचार बता रहे है, रतालू -जमीं में उगने वाला कंद है, इसकी पत्तीं बेल की पट्टी से मिलता जुलता है, और यह भुर भुरी और अच्छी धार वाली जमीन में होता है इसका बारिश से लेकर असाड मास तक इसकी बुआई होती है| और इसका ओषधिय प्रयोग है| सुखा रतालू बिच्छु के दंश के स्थान पर लगाने से दंश का असर कम हो जाता है| मंदाग्नि, वात विकार में एक किलो ग्राम रतालू को छिल कर काट कर डाले जब वहा उबल जाए आटा के सामान मचल ले और गाय का घी 500 ग्राम, कड़ाई में डालकर आच पर रखे और रतालू मिलाकर जब बदाम रंग का होने लगे फिर उसमे 2 किलो गुड़ मिला ले, सौट बादाम सबको मिला ले और रोज खाने से मंदाग्नि, रोग कम हो सकता है| अधिक जानकारी के लियें संपर्क नम्बर@9826040015. (180135) GT
Posted on: Dec 15, 2020. Tags: HEALTH DEPARTMENT SONG VICTIMS REGISTER
रघुवीर, रघुवीर स्वरुप सुंदर...भजन-
अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से सोनू राठौर एक भजन सुना रहे हैं:
रघुवीर, रघुवीर स्वरुप सुंदर-
सीताराम, सीताराम-
कबीरदास है गुरु स्वरुप सुंदर-
सीताराम, सीताराम-
रघुवीर, रघुवीर स्वरुप सुंदर-
सीताराम, सीताराम...(AR)
Posted on: Dec 15, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER
धूरि भरे अति शोभित श्याम जू...कविता-
ग्राम-मवई, जिला-बाँदा (उत्तरप्रदेश) से सुरेंद्र पाल एक कविता सुना रहे हैं:
धूरि भरे अति शोभित श्याम जू-
तैसी बनी सिर सुन्दर चोटी-
खेलत खात फिरैं अँगना-
पग पैंजनिया कटि पीरी कछौटी-
वा छवि को रसखान विलोकत-
वारत काम कलानिधि कोटी-
काग के भाग कहा कहिए हरि हाथ सों ले गयो माखन रोटी...(AR)
