कहीं नहीं जाना यहीं चली आना...भक्ति गीत
शैलजा मिश्र जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक भक्ति गीत सुना रही हैं:
कहीं नहीं जाना यहीं चली आना-
कहाँ की तैयारी है वो माँ शेरावाली है-
तेरे दुवारे मैया एक लंगड़ा पुकारे-
लंगड़े को पैर देना माँ अरज हमारी है-
तेरे दुवारे मैया बाँझन पुकारे-
बाँझन को पुत्र देना माँ अरज हमारी है-
तेरे दुवारे मैया अंधा पुकारे-
अंधे को आँख देना अरज हमारी है-
कहीं नहीं जाना...
Posted on: Dec 07, 2017. Tags: SONG Shailja Mishra VICTIMS REGISTER
माटी होही तोर चोला रे संगी...छत्तीसगढ़ी गीत-
ग्राम-लांजित, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मनबोध सिंह मरकाम एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
माटी होही तोर चोला रे संगी-
माटी मे उपजे माटी मै बाढ़े-
मत बन ककरो दुश्मन बैरी-
जना हैं एक दिन तोला रे संगी-
माटी होही तोर चोला...
Posted on: Dec 06, 2017. Tags: MANBODH SINGH MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : महुए के फल और फूल से वनवासी को भोजन, दवा, तेल,आय सब कुछ मिलता है...
भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से राकेश कुमार दोहरे वनोपज देने वाले एक पेड़ के विषय में बता रहे हैं वे बता रहे हैं महुवा एक ऐसा पेड़ है जिसके फूल और फल दोनों का उपयोग किया जा सकता है, वनों में निवास करने वाले आदिवासी उस पेड़ के फूल का उपयोग शराब बनाकर दवा के रूप में प्रयोग करते है लेकिन इसका ज़्यादा सेवन करने से इसके दुष्परिणाम भी होते है. महुवे को चने के सांथ फरा बनाकर खा भी सकते हैं. उसके फल से तेल निकाला जाता है जिसे सर्दी के मौसम में शरीर को कोमल रखने के लिए उपयोग में लिया जाता है. इसके खली से मुह के छाले का इलाज किया जाता है सांथ ही तेल का उपयोग दिये जलाने में कर सकते है गाँव के निवासियों का ये आय का एक अच्छा साधन है |राकेश कुमार@9617339569.
Posted on: Dec 06, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
मनमानी किराये को कम करने के लिए महिला स्वसहायता समूह की बहनें चक्का जाम कर रही हैं...
ग्राम-अस्तरा, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से पवारा कुंजाम बता रही हैं वे प्रदान संस्था की मास्टर ट्रेनर हैं. उनके गाँव में हफ्ते में एक दिन बाजार के दिन वाहन चलते हैं जो मनमानी किराया वसूलते हैं जिसका विरोध करने के लिए उनके महिला सांथी और संगठन के लोगों ने दो सोमवार से चक्का जाम किये हुवे हैं इनका कहना है जब तक उचित किराया नही किया जाएगा तब तक ये चक्का जाम करते रहेंगे। वे कह रही हैं कि शासन उनके गाँव तक नही पहुँच पाती है इसलिए और भी कई कार्यो में ऐसी अव्यवस्था बनी हुई है जिससे वे शासन की योजनाओं से वंचित रह जाते हैं जिसके लिए अब महिलायें जागरूक हो रही हैं और अपने हक को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं |
Posted on: Dec 06, 2017. Tags: BASTIRAM NAGWANSHI SONG VICTIMS REGISTER
किसान, उसके लोभी बेटे और सांप की कहानी -
एक गाँव में एक किसान रहता था किसान की सारी जमीन अकाल से सूख चुकी थी. ठंडी के मौसम में वह एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था उसी समय सांप दिखाई दिया किसान ने सोचा यह सांप यहीं रहता है| लेकिन मैंने कभी इसकी पूजा नहीं की शायद इस वजह से मेरी जमीन सूख गई है| अब मैं हर रोज इस सांप की पूजा करूँगा | किसान एक कटोरे में दूध लेकर आया और उसने उसे बिल के पास रख दिया और कहा सर्प देवता मैं नहीं जानता था कि तुम यहाँ रहते हो इसलिए मैंने तुम्हारी पूजा कभी नहीं की मुझे क्षमा कर देना अब मैं आपकी पूजा हर रोज करूँगा | किसान ने सांप को दूध दिया अगली सुबह दूध की कटोरी में सोने का सिक्का था अब हर रोज किसान सांप को दूध दिया करता और एक सोने का सिक्का प्राप्त करता था | एक दिन किसान दूसरे गाँव गया उसने अपने बेटे को हर रोज दूध देने को कहा उस शाम उसका बेटा दूध देने को गया अगले सुबह कटोरी में सोने का सिक्का दिखाई दिया तो उसके बेटे ने सोचा ये सांप कंजूस है इसके बिल में बहुत सारे सोने है | लेकिन ये हमे हर रोज एक ही सिक्का देता है | अगर मैं इसे मार दूँ तो सारा सोना मिल जायेगा | अगले दिन सांप को दूध देते समय लड़के ने एक छड़ी से वार किया तो उसने लड़के को काट लिया और लड़का वहीँ पर मर गया | सांप भी जख्मी था वह भी धीरे-धीरे अपने बिल पर गया किसान के रिश्तेदारो ने उनके बेटे का दाह संस्कार किये जब किसान लौटा तब बहुत नाराज हुआ | उसे सांप पर गुस्सा आया सांप ने उसे सब कुछ बताया तब किसान ने कहा मैं जानता हूँ इसमें मेरे लड़के का ही दोष है| मैं उसके तरफ से आपसे माफ़ी मांगता हूँ| किसान दूसरे दिन दूध दिया और फिर से बोला मेरे बेटे को माफ़ कर देना सांप कहा इसमें न तो आपके बेटे का दोष है न मेरा दोष है स्थिति ही कुछ ऐसी थी भाग्य जो होगा उसे कौन टाल सकता है जैसी करनी वैसी भरनी |


