जंगली जड़ी बूटी से लोगो का इलाज करते हैं, हड्डी टूटने पर दवा देते हैं...कहानी-
पुजारी पारा, ग्राम-मामडपाल, ब्लाक-दरभा, जिला-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से बुटलू बता रहे हैं| वे पारंपरिक तरीके से लोगो का इलाज करते हैं| मुख्य रूप से वे हड्डी के टूटने पर दवा देते है| वे पढ़े लिखे नहीं है| अपने पिता से उन्होंने इलाज करना सीखा है | दवा बनाने के लिये जंगल से प्राप्त जड़ी बूटी का उपयोग करते हैं| उनके पास गांव के आस-पास के लोग इलाज के लिये आते हैं|
Posted on: Apr 26, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG DARBHA JAGDLPUR STORY
डाल-डाल पर पंछी बैठा डाल ही उनका घर...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुन रहे हैं :
डाल-डाल पर पंछी बैठा डाल ही उनका घर-
डाल में वे पंख पसारे, डाल ही सबसे सुंदर-
जड़ से उनको क्या लेना, जड़ तो मिट्टी के अंदर-
फिर भी जड़ मजबूत हो जड़ से ही डाली सुंदर-
जड़ यदि हो कमजोर तो सूख जायेगी डाली-
पेड़ यदि सूख मर जायेगी, तो क्यों डाले माली पानी...
Posted on: Apr 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मछली जल में तैर रही थी, पड़ा व्याध की आंख...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मछली जल में तैर रही थी, पड़ा व्याध की आंख-
मछली यह जान न पाई, लगी है जल में फास-
तैरने में वह मगन थी, पानी भी न था-
उसे क्या फर्क पड़ता चाहे हो पानी अथाह-
पानी की वह परी है, पानी उसकी है घर...
Posted on: Apr 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
बड़ी बुना मुसोरी, लंका बुना छेना रे जोड़ी ले, के जोड़ी ले...धुरवा गीत
ग्राम-गुमडपाल, विकासखण्ड-दरभा, जिला-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से बिमला, शांति और सुंदरी एक गीत सुना रही हैं:
बड़ी बुना मुसोरी, लंका बुना छेना रे जोड़ी ले-
के जोड़ी ले-
दादा कदे जोड़ा सुता होऊ पीने धो-
तोरे पोकाना तोरे कली चुटली आमचा मुन-
बोलुवा जल बोला दुमडा पालेया मा-
देनाई हा बोला रे वाड़ी बुनावी तोरी...
Posted on: Apr 26, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG DARBHA JAGDALPUR SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : मोटापा कम करने का घरेलू नुस्खा-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी मोटापा कम करने का घरेलू नुस्खा बता रहे हैं | त्रिकुटा चूर्ण 50 ग्राम, अलसी बीज 50 ग्राम, अजावईन 50 ग्राम, नागर मोथा 50 ग्राम, त्रिफला 50 ग्राम, सहजन या मुनगा के बीज 50 ग्राम, निर्गुंडी बीज 50 ग्राम सभी को साफ़ कर चूर्ण बना लें| और सुरक्षित रख लें| एक-एक चम्मच चूर्ण खाली पेट दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करें| इससे मोटापा कम करने मे लाभ होता है | लगातार तीन माह तक इसका सेवन कर सकते हैं| इसका प्रयोग बच्चे न करें| मिर्च, मसाला, तेल, खटाई, गरिष्ठ भोजन का प्रयोग कम करें| नशा न करें| मैदा, शक्कर नमक का प्रयोग कम करें| चावल के स्थान पर रोटी का प्रयोग करें| अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं: एच डी गांधी@9111061399.
