हरि बिना निचटे हरान्जिला रे...सरगुजिया लोकगीत

कैलाश सिंह पोया ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से एक सरगुजिया लोकगीत सुना रहे हैं, इस गीत को भादों के महीने में करमा का पेड़ लगाकर उसके आगे करमा नृत्य की शैली में गाते और नाचते हैं – हरि बिना निचटे हरान्जिला रे-
बिना मछरी पानी बिना धान-
एक ठे पुतरा बिना कलपे परान जिला-
बात बाते बात बाढ़े तरकी से बाढ़े कान-
तेल-फुलेल से लरका बाढ़े-
पानी से बाढ़े धान-
हरि बिना निचटे हरान्जिला रे...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER

SOS: Many suffering from fever, Medical officers not helping, Please call them...

Anil Bamne is visiting Borkheda village in Itarsi tehsil of Kesla block in Hoshangabad district in Madhya Pradesh and finds many in village suffering from seasonal fever. People are spending lots of money on quacks, he says. Then he tried to call Block Medical officer and Auxiliary Nurse Midwife but none picked his phone. You are requested to call BMO Sukhtawa@9424434681 and ANM@9977729784 to send a medical team to help suffering villagers. For more Anil Bamne@9977161570

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: ANIL BAMNE SONG VICTIMS REGISTER

नोनीली वेया ली...गोंडी विवाह गीत

जिला-बीजापुर, छत्तीसगढ़ से सुनीता एमला एक गोंडी गीत सुना रही है यह गीत तब गया जाता है जब लड़का और लड़की को शादी के बाद कमरे में घुसाया जाता है:
नोनीली वेया ली – आले को को के लायो-
मेरे नोनी निमुदियाल-
मोको तानु को दिल को सुपाडा-
को को ली भईया ली-
मोनिली भईया ली...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: Bhan Sahu SONG VICTIMS REGISTER

अब देश को बेटियां कितनी खटकती है...कविता

ऋषभ मिश्र ग्राम-ओझापुरवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं:
दृश्य ऐसा देखकर सांसे लटकती है-
फल नही अब पेड़ पर लाशें लटकती हैं-
वासना की ये सुनामी चीखकर कहती है-
सभ्यताएं रस्ते कैसे भटकती है-
मान-मर्यादा सुरक्षा प्यार सब गायब-
अब देश को बेटियां कितनी खटकती है-
चीख आंसू, जुल्म शोषण जातियां,ब्याह – आज आँगन में मटकती हैं-
आज तक पिघला नहीं है-
दिल दुआओं का चाहते-
चाहते कितना चरण सिर पटकती है-
सिर्फ आधी रात को माँ ही बताएगी-
बाप की ये हड्डियाँ कैसे चटकती हैं-
बादलों की आँख में जब शर्म दिखती है-
तब कहीं इस खेत में खुशियाँ फटकती हैं-
दौलत से सांस दंदे पेट भरती है-
गोलियां सल्फास की-
बहुएं गटकती हैं-
वक्त बदला है अभी तुम देखते जाओ-
दूर घड़ियाँ हाथ से क्या-क्या झटकती हैं...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: Rishabh Mishra SONG VICTIMS REGISTER

कहां के पहुना कहां चली आया हाय रे कहां के पहुना...डोमकच गीत -

ग्राम-बरपटिया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रामचरन जगत, राम सुभाष चटर्जी, सुखराम आयाम एक पारंपरिक डोमकच गीत सुना रहे हैं :
कहां के पहुना कहां चली आया हाय रे कहां के पहुना – कहां चली आया रे कहां जग लोलो हमर गोडो ला धोवाय – खेला-खेला भले ले ले गोडो ला धोवाय लेरे गोडो ला धोवाय – गोविदपुर कर पहुना बरा पाटिया आया हाय रे गोविदपुर के पहुना – पारा पाटिया रे माझे खोर लोलो हमर गोडो ला धोवाय – खेला-खेला भले ले ले गोडो ला धोवाय लेरे गोडो ला धोवाय...

Posted on: Dec 15, 2017. Tags: DHANSAY MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

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