ऐ गा बनाने वाले कैसा रेल बनाया जी...गीत -

संतोष कुमार अहिरवार नया साल की शुभकामना देते हुवे एक गीत सुना रहे हैं :
ऐ गा बनाने वाले कैसा रेल बनाया जी – काहे के इंजन भईया काहे के कोयला है – काहे के अगिन जलाया जी – कहे के ओमा लाइन बिछे है कौन वेग चले जाना जी – तन के इंजन भईया मन के कोयला है – खोद के अगिन जलाया जी – दोनों नयन के लाइन बिछे है देख यमपुर चले जाना बनाने वाला...

Posted on: Jan 02, 2018. Tags: SANTOSH KUMAR AHIRWAR SONG VICTIMS REGISTER

मैं विधवा हूँ, मुझे 2 साल तक विधवा पेंशन दिए लेकिन 3 साल से बंद कर दिए है, कोई सुनते नहीं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा से चंद्रभान मार्को गौरा चौक, ग्राम-हटका चारामा, विकासखंड-नरहरपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) के जया बाई सोरी से बात कर रहे हैं जो बता रही है कि उनको विधवा पेंशन 2 साल तक मिला लेकिन अभी 3 साल से विधवा पेंशन बंद कर दिए है और किस कारण से बंद किया गया है वो भी नहीं बताया है गया| उसके लिए उन्होंने कई बार ग्राम सभा में शिकायत की तो मिलेगा-मिलेगा बोलकर गुमराह कर रहे है लेकिन अभी तक नहीं मिला है | इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद की अपील कर रहे है कि इन अधिकारियो से बात कर उनको विधवा पेंशन दिलवाने में मदद करें: C.E.O.@9424299510, सचिव@9098150009. चंद्रभान मार्को@9111431320.

Posted on: Jan 02, 2018. Tags: JAYA BAI SORI SONG VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर: ग्रामीण आदिवासी महिलाएं वनों से प्राप्त वस्तु से झाड़ू बनाती है कुछ उसे बेचती भी हैं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा के साथी राकेश कुमार आज ग्राम-दमकसा, ब्लॉक दुर्गूकोंदल जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में हैं वहां की एक बुजुर्ग महिला मंगली बाई गोंडी में बता रही हैं वे अपने लिए झाड़ू खुद बनाती हैं जिसके लिए सामग्री उन्हें वनों से सर्दी के मौसम में प्राप्त होता है. उन्होंने झाड़ू बनाने की कला अपने पूर्वजों से देखकर सीखी है और वे इस कला को सिखाती भी हैं अभी अपने द्वारा बनाये झाड़ू का उपयोग केवल अपने घर की सफाई करने के लिए करती हैं लेकिन उनके सांथी इससे रोजगार भी करते है इस तरह से ग्रामीण महिलाएं वनों से प्राप्त चीजों का उपयोग न केवल अपने दैनिक कार्यों में करते हैं बल्कि उसका रोजगार करने की भी कला रखते हैं...

Posted on: Jan 02, 2018. Tags: RAKESH KUMAR SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

धरती माता के आशा किसान भाई, करा तुम किसानी करा हो...बघेली किसान लोकगीत -

ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-फुन्गा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से रेवालाल केवट एक बघेली किसान लोकगीत सुना रहे हैं:
धरती माता के आशा किसान भाई, करा तुम किसानी करा हो-
कांधे म धरके फरुहा कुदारी, सांथ मा दादू के महतारी-
खेतन खेत बनवा किसान भाई, करा तुम किसानी करा हो-
खेतन खेत मा डारा खादा जौने अन्न उग जावय ज्यादा-
धरती माता के आशा किसान भाई, करा तुम किसानी करा हो...

Posted on: Jan 02, 2018. Tags: REWALAL KEWAT SONG VICTIMS REGISTER

सूत्रधार मरा नहीं करते...सफदर हाशमी पर कविता -

मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार शहीद रंगकर्मी सफदर हाशमी को याद करते हुए सरला माहेश्वरी की एक कविता सुना रहे हैं :
सूत्रधार मरा नहीं करते – तुम्हारे ताजा खून की कसम हम फिर वही खेल दिखायेंगे – हल्ला बोल हल्ला बोल की रणभेरी बजायेंगे – गरमायेंगे गरीबों का लहू – आग बनाकर शब्दों को तुम्हारे फहरायेंगे परचम की तरह गीतों को तुम्हारे – बस्ती-बस्ती नुक्कड़-नुक्कड़ हर चौराहे पर खेल दिखायेगा जमूरा तुम्हारा – करेगा फिर बेआबरू लोकराज का बाना पहने ढोंगी राजा को...

Posted on: Jan 02, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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