भाव बिना बाजार में, वस्तु मिले नही मोल...श्लोक-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता अपने जीवन यापन की पद्धति जो पूर्वजो के समय से चली आ रही है, उसे बताते हुए एक श्लोक सुना रहे हैं:
भाव बिना बाजार में, वस्तु मिले नही मोल-
भाव बिना हरी क्यों मिले, भाव सहित हरी बोल-
चिंता से चतुराई घटे और घटे शरीर-
पाप से लक्ष्मी घटे कह गये दास कबीर-
दया धर्म का मूल है और पाप मूल अभिमान-
तुलसी दया न छाडीये जब तक घट में प्राण-
बड़ा हुआ सो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर-
पंछी को छाया नही फल लगे अति दूर-
माया मरी न मन मरा और मर-मर गये शरीर-
आशा तृष्णा न मरी का गये दास कबीर...

Posted on: May 11, 2018. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER

भोला के जटा में बसल गंगा मैया...भक्ति गीत

ग्राम-बोटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सतरूपा पटेल एक भक्ति गीत सुना रहे हैं :
भोला के जटा में बसल गंगा मैया-
भोला चले हिमांचल की ओर ऐ गौरा के सुहागवा-
भोला के कानो में बिछिया के कुंडल-
भोला के गले में सरपो की माला-
भोला के कमर में मिरगा की छाला-
भोला के हाथों में डमरू त्रिसुलवा...

Posted on: May 09, 2018. Tags: SATRUPA PATEL SONG VICTIMS REGISTER

अखबार पत्र पत्रिकाओं में कई विज्ञापन झूठे और भरमाने वाले होते हैं, उनके चक्कर में न पड़ें...

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता बता रहे हैं अखबारों में कई सारे छोटे-बड़े विज्ञापन होते हैं, इन विज्ञापनो के माध्यम से लोगो को ठगने का काम भी किया जाता है, इसी का एक उदहारण वशीकरण है, जिसको अखबारों का सहारा लेकर बेचा जाता है, वह बता रहे हैं, इस तरह की चीजों को खरीदना अंधविश्वाश में पड़ना और बढ़ावा देना है, और खुद को धोखा देना है, इसलिए आप अपने इन्द्रियों को वश में करिए, अर्थात खुद को नियंत्रण में रखिये, यदि खुद को नियंत्रित कर लिए तो सब कुछ अच्छा होगा| पत्र पत्रिकाएँ अपने मुनाफे के लिए कुछ भी गलत सलत को भी विज्ञापन के नाम पर परोस देती है

Posted on: May 09, 2018. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER

कौने बरन के गजरा हो मोहे नीके ना लागे...बघेली लोकगीत

ग्राम, पोस्ट-उलहीखुर्द, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश कुमार गुप्ता एक बघेली लोकगीत सुना रहे हैं :
कौने बरन के गजरा हो मोहे नीके ना लागे-
मइके के निक लागे भईया भतिजवा-
ससुरे लहुरा देवरवा हो मोही नीके ना लागे-
मइके के नीक लागे घरवा दुवरवा-
ससुरे के कतका महलवा हो मोही नीके ना लागे-
कौने बरन के गजरा हो मोहे नीके ना लागे...

Posted on: May 08, 2018. Tags: RAMESH KUMAR GUPTA SONG VICTIMS REGISTER

किसान स्वर: पहले हमारे यहाँ कोदो, मेढ़ो, सांवा की खेती होती थी, लेकिन अब सिर्फ धान...

ग्राम-कुप्पा, तहसील-ओड़गी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से देव प्रसाद खेती के बारे में बता रहे है, पहले मेझरी, सांवा, कोदो, कुटकी, मेढ़ो आदि की खेती ख़ूब हुआ करती थी, लेकिन धीरे-धीरे धान चावल की खेती सब करने लगे है, पहले के धान बीज को भी अब भूलने लगे है. पौष्टिक वाला अन्न अब कम होता जा रहा, क्योंकि अब देशी बीज और खाद भी पहले जैसे नहीं रहे, फिर भी अन्य जगह के मुकाबले हमारे यहाँ पर अब भी गोबर खाद का ही उपयोग किया जाता है|जिससे उगने वाला अन्न धान दाल दलहन पौष्टिक व स्वादिष्ट रहता है| कोदो कुटकी, मेझरी, सांवा, मेढ़ो लगाने के इच्छुक किसान मित्रो के लिए बीज उपलब्ध है. देव प्रसाद@7697080920

Posted on: May 02, 2018. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

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