गजब दुःख पायो भैया बढ़ाय के परिवार, गजब दुःख पायों...कर्मा गीत

ग्राम-पंडरीपानी, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से सुखसागर सिंह के सांथ अनसुईया सोनी और बेलाबाई हैं जो एक कर्मा गीत सुना रही हैं :
गजब दुःख पायो भैया बढ़ाय के परिवार, गजब दुःख पायों-
आमा के डाली हलाऊ कैसे, एक दर्जन लईका चलाऊ कैसे-
बडकू के मूड चढय छोटकू के बुखार, भैया छोटकू के बुखार-
टोरियन के कान पकय होई गय दिन चार, भैया होई गय दिन चार-
मझिला के फीस बिना बंद है पढाई, भैया बंद है पढाई-
कहाँ पाऊं रे भैया पैसा रुपैया,गजब दुःख पायो...

Posted on: Aug 02, 2017. Tags: SONG SUKHSAGAR SINGH PAVLE VICTIMS REGISTER

आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: बेचैनी, भूख न लगने का घरेलू उपाय

Devendra Singh Lodhi calling from Chhataini village, post Nawastha, Ajay Garh tehsil, Panna district, Madhya Pradesh informs us today about an easy home remedy that can fix health issues like uneasiness, nausea, loss of appetite, not feeling like working and feeling laziness . Take 8 leaves of henna plant, a finger’s length of jalneem plant, a flower of rose, chew these half an hour before eating the morning meal after brushing your teath. Consume these regularly for better and long term results. Lodhi@9754649943

Posted on: Jul 28, 2017. Tags: Devendra Singh Lodhi

सुन्दर मीठे फल खाए हम, सब की बढे अकल...कविता

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छतीसगढ़) से कैलाश सिहं पोया एक कविता सुना रहे है :
सुन्दर मीठे फल खाए-
हम सब की बड़े अकल-
केला सेव संतरा आम-
चीकू तरबूज इस नाम-
सीता फल अंगूर पपीता-
जो खाता खुशियों में जीता...

Posted on: Jul 21, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER

कि जंगल झाड ला बचाई भाई जंगल झाड ला बचाई...जंगल गीत

अगर जंगल नहीं रहेगा तो हम भी नहीं रहेंगे | बोल रहे हैं कैलाश सिंह पोया ग्राम देवरी सूरजपुर छत्तीसगढ़ से और इस विषय पर एक गीत गा रहे हैं:
कि जंगल झाड ला बचाई भाई जंगल झाड ला बचाई-
जंगल का पेड़ पौधा लागत है दवाई, अब जंगल ला बचाई-
अरे हर्रा महुआ साजा सराई जंगल ला बचाई, अरे जंगल ला बचाई – गेड़ा झन कटार भाई, जंगल ला बचाई-
जलावन देखा डूखी गेडा ला काट के-
सीधा सीधा पेड़ पौधा ओला छंटाई कराई-
पेड़ पौधा हम के हवा और पानी देथे-
मिलके जंगल ला बचाई...

Posted on: Jul 15, 2017. Tags: Kailash Singh Poya

काया है जंगल के लकड़ी, आग में जलत उड़ जाना...जीवन गीत

कैलाश सिंह पोया ग्राम देवरी, जिला सूरजपुर छतीसगढ़ से भोजपुरी गीत सुना रहे हैं:
काया है जंगल के लकड़ी-
आग में जलत उड़ जाना-
तू कभी ना भुलाना-
दिवाना तेरा दो दिन का-
जैसे काया है कागज के कठपुतली-
हवा लगत हैं उड़ी जाना-
तू कभी ना भूलाना , दिवाना तेरा .....
एक काया है माटी का घड़ा-
ठोकर लगत फूट जाना-
की कभी ना भूलाना-
दिवाना तोर दो दिन का...

Posted on: Jul 14, 2017. Tags: Kailash Singh Poya

« View Newer Reports

View Older Reports »