काया है जंगल के लकड़ी, आग में जलत उड़ जाना...जीवन गीत
कैलाश सिंह पोया ग्राम देवरी, जिला सूरजपुर छतीसगढ़ से भोजपुरी गीत सुना रहे हैं:
काया है जंगल के लकड़ी-
आग में जलत उड़ जाना-
तू कभी ना भुलाना-
दिवाना तेरा दो दिन का-
जैसे काया है कागज के कठपुतली-
हवा लगत हैं उड़ी जाना-
तू कभी ना भूलाना , दिवाना तेरा .....
एक काया है माटी का घड़ा-
ठोकर लगत फूट जाना-
की कभी ना भूलाना-
दिवाना तोर दो दिन का...
