बूढी मईया कहे सोने के कुदरिया गढ़ाइयो दे हूँ...देवी भजन
ग्राम-गोविंदपुर, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी के साथ में जितनराम मरपच्ची एक देवी भजन गीत सुना रहे है:
बूढी मईया कहे सोने के कुदरिया गढ़ाइयो दे हूँ-
में जाहूं बगरा कोड़ारे सुरुजा बात बोले-
माई चलाले अधरती गे सेवा ला करूँ भिनु सारे गे माई-
सेवाला लेले महारानी गे दाई-
कुदरगढ़ी कहे सोने के कुदरिया गढ़ाइयो दे हूँ-
बूढी मईया कहे सोने के कुदरिया गढ़ाइयो दे हूँ...
Posted on: Sep 26, 2018. Tags: BHAJAN CG PRATAPPUR RUPLAL MARAVI SONG SURAJPUR SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
बारह बजे मेला लगे, करितो पसीना छूटे... डोमकच गीत-
ग्राम-कोटया, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक डोमकच गीत सुना रहे हैं :
बारह बजे मेला लगे, करितो पसीना छूटे-
बारह बजे मेला लगे, करितो पसीना छूटे-
चल काम ढेलुवा ला, नजारी चलालत-
चल काम घेलुवा ला, नजरी चला ले मैना...
Posted on: Sep 26, 2018. Tags: CG DOMKACH MEWALAL DEWANGAN SONG SURAJPUR SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
ये कैसा खिलौना है, जो छूते ही टूट गया...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
ये कैसा खिलौना है, जो छूते ही टूट गया-
दिल में जो अरमान था, पल भर में मिट गया-
आँखों के सामने मेरी माँ चल बसी, देखते-देखते चिता जल गई-
धुंआ उठा एक पल के लिए और फिजा में बिखर गई-
दिल की तमन्ना दिल में रह गई, मेरी माँ मेरे से बहुत दूर चली गई-
आँखों के आगे अँधेरा छा गया-
आंसू पोछने वाला भी कोई ना रहा...
Posted on: Sep 25, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मन से मन को मिलाईये तो मन मंदिर हो...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गीत सुना रहे हैं, जिसका शीर्षक है मन ही मंदिर :
मन ही मंदिर मन ही पूजा, मन से बड़ा ना कोय-
मन से मन को मिलाईये तो मन मंदिर हो-
मन ही ब्राम्हा, मन ही विष्णू, मन ही सदा शिव हो-
मन ही आकाश, मन ही पताल, मन ही नक्षत्र हो-
मन ही लक्ष्मी, मन ही दुर्गा, मन ही सरस्वती हो-
मन से मन को मिलाईये तो मन मंदिर हो...
Posted on: Sep 24, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मम्मी और बेटी के बीच की वाद संवाद...
मम्मी बेटी से कहती है बेटी अब तुम लड़को से ज्यादा मटरगस्ती मत किया करो, तुम जवान हो चुकी हो, बेटी कहती है मम्मी इस उमर में मटरगस्ती नही करूंगी तो क्या बुढ़ापे में करूंगी-
मम्मी-अब तुम लड़को से ना मिला करो बदनामी होगी-
बेटी-आप भी तो अप्पू अंकल से पापा से छुप-छुपकर मिला करती हैं, क्या आपकी बदनामी नही होती है-
मम्मी-बेटी मै तो मम्मी बन चुकी हूँ, मेरा क्या है पर अभी तुम कवारी हो, तुम्हारी शादी तक नही हुई है-
बेटी-मम्मी मेरी भी शादी हो जाएगी, मै भी माँ बन जाउंगी आप चिंता किया ना करें-
मम्मी-बेटी तुमको कौन समझाए, तुम तो नासमझ, बड़ी जिद्दी हो-
बेटी-मम्मी आप भी तो मेरी उमर में बड़ी जिद्दी नासमझ रही होंगी, इसलिए तो मै भी आप की तरह हूँ-
मम्मी कोई जवाब नही दे पाती, दोनों चुप होकर अलग-अलग चले जाते हैं...
