क्यों नहीं इसे मरा हुआ तन्त्र कहते हैं? एक कविता

जहाँ जनता रोती है और लोकतंत्र हँसता है
न्यायलय भी कैसा अँधा है जो सिर्फ दलीले सुन सकता है और तारीखे दे सकता है,
पर उससे न्याय की उम्मीद करना बईमानी है।
पुलिस प्रशासन से लाख मिन्नतें मांग लो पर उनका जमीर नहीं जागता,
मुर्दा भी पड़े-पड़े सड़ जाये वो हाथ भी नहीं लगायेंगे।
राजा (मुख्यमंत्री) के दरबार में आपको पोटली भर आश्वासन तो मिल जायेगा,
पर उस पर कार्यवाही धेला भर भी नहीं होगी।
महामहिम (राष्टपति) का दरबार सबके लिए नहीं खुलता बस चिठ्ठी भेजिए और अगली सदी आने का इंतज़ार करिए,
पता नहीं जब तक नम्बर आयेगा तब आदमी बचेगा या नहीं।
मंत्री – नेता, दलाली और कमीसन खोरी के बगैर अपनी दुम तक नहीं हिलाते,
फ़रियाद सुनना तो दूर की कोड़ी है।
क्यों इसे लोकतंत्र कहते है ?
क्यों नहीं इसे मरा हुआ तन्त्र कहते हैं?
मरा हुआ तंत्र...
मरा हुआ तंत्र ...
के एम् भाई
8756011826

Posted on: Nov 09, 2012. Tags: KM Yadav

लोकतंत्र मर गया है?...एक कविता

आज फिर सजा है जिला कार्यालय
फरियादी है कागजो का ढेर है
नीली पीली बत्ती वाली गाडियों का आवागमन है
खाकी वर्दी वाले भी है और सफेदपोशों की भी भीड़ है
जमीन भी वही है और धूप भी घनी है, पर मौसम का मिजाज कुछ अजीब है
पेड़ो की डालियों पर आज कोई शोर नहीं है, पर फिजाओ में कुछ अजीब सी आवाज गूँज रही है
ये कैसी चीखे है बचाओ बचाओ की, पर किसी को सुनाई क्यों नहीं देती
हवा में कुछ अजीब सी महक है जलने की, पर आसमान तो साफ़ है
अरे ये क्या जमीन पर माँ- बेटी जिन्दा जल रही है
अरे इन्हें कोई बचाता क्यों नहीं कोई आग बुझाता क्यों नहीं
अरे ये भीड़ शांत क्यों है अरे ये इंसानी दिल पत्थर क्यों बना हुआ है
अरे ये खाकी वर्दी वाले आगे क्यों नहीं बढ्ते अरे ये कोट धारी भी मूक खड़े है
ऐ हवा तू भी आज शांत है और ये बादल भी आज नहीं बरस रहे
अरे ये हजारो की भीड़ वाला कचहरी परिसर आज सूना सूना सा क्यों लग रहा है
अरे कोई वकील, कोई मुंशी, कोई पेशकार, राहगीर कोई भी नहीं जो इन जलती महिलाओ को बचाए
अरे ये डीएम साहब कहाँ गए उन्हें इन महिलाओ की चीख पुकार क्यों नहीं सुनाई देती
अरे क्या सभी की संवेदनाये मर गयी है या फिर दिल पत्थर बन गए है
लगता है इंसानियत मर गयी है
नहीं नहीं इस देश का लोकतंत्र मर गया है
इस देश का लोकतंत्र मर गया है

Posted on: Oct 26, 2012. Tags: KM Yadav

ग्रामीण महिला और अधूरे सपने...एक कविता

एक अदद जहाँ घूमने की आजादी मिल जाये अगर
सपनो की दुनिया बसाने की एक राह मिल जाये अगर
अपने न भी हो तो कम से कम अपनों का साया मिल जाये अगर
रिस्तो का परिवार न सही बस जिंदिगी जीने का एक बहाना मिल जाये अगर
भूखे पेट को भोजन न सही कम से कम अन्न का एक दाना मिल जाये अगर
चार दिवारी का आशियाना न हो बस रहने का एक ठिकाना मिल जाये अगर
रेशमी कपड़ो का ताना बना न सही कम से कम तन ढ़कने को एक टुकड़ा कपड़ा मिल जाये अगर
सोने चाँदी के आभूषण न हो बस एक चुटकी सिन्दूर का सहारा मिल जाये अगर
दर्द से करहाती देह को दवा न सही कम से कम हाल पूछने वाला कोई मिल जाये अगर
मान सम्मान की माला न सही बस स्वाभिमान को जगाने वाला कोई मिल जाये अगर
सुख सौन्दर्य न सही कम से कम बहते आसुओ को पोछने वाला कोई मिल जाये अगर
एक अदद जहाँ घूमने की आजादी मिल जाये अगर ...
सपनो की दुनिया बसाने की एक रह मिल जाये अगर ...........................

के.एम्. भाई
8756011826

Posted on: Oct 10, 2012. Tags: KM Yadav

गाँधी तू कहाँ गया, तेरा देश मिट रहा है...

गाँधी तू कहाँ गया
तेरा देश बंट गया
तेरे लोग बंट गए
जातिया बंट गयी
और अब तेरे राज्य भी बंट रहे है
गाँधी तू कहाँ गया
तेरा भारत टूट रहा है
नदिया बंट गयी
बंट गयी फसले
और अब तेरे जिले भी बंट रहे है...
गाँधी तू कहाँ गया
तेरा देश मिट रहा है
मिट गयी साझी विरासत
मिट गयी साझी संस्कृति
और अब तेरे साझे रिश्ते भी मिट रहे है ...

के एम भाई

Posted on: Oct 03, 2012. Tags: KM Yadav

Old man unable to pay fees dies in front of Govt hospital without treatment...

KM bhai from Kanpur in Uttar Pradesh is telling us about an incident in Govt Haylett hospital in the city where an old man did not get any medical attention because he did not have any money and the person died in front of the emergency ward of the hospital. He says though we call ourselves democracy but we have not been able to arrange health for our poor and weak. For more KM bhai can be reached at 08756011826

Posted on: Sep 15, 2012. Tags: KM Yadav

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