दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें...कविता
उतरप्रदेश कानपुर से के एम भाई करुणा शानबाग के जन्मदिन पर अपनी एक कविता के माध्यम से श्रधांजलि दे रहे है:
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें-
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें-
अब तो भेड़ियाँ भी चिल्लाती है-
मेरे इन आखों से आंसू की जगह-
लहू कि कतारें बह जाती है-
दुपट्टे का रंग बताता है-
मेरे जिस्म कि कहानी-
दर्द से ज्यादा तकलीफदेह होती है-
लोकतंत्र कि नाजायज जवानी-
भूख नहीं मरती है,मुझे पर तेरे-
नंगे समाज को देखकर मेरी सांसे उखड़ जाती है-
मौत से ये जिंदगी डरती है-
मौत से ज्यादा ये जिंदगी डरती है...
Posted on: Jun 05, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
मोदी सरकार का नारा है, बच्चों से बाल श्रम करवाना है...कविता
कानपुर उतरप्रदेश से के एम भाई लघु उद्योग क़ानून में आये नए बदलाव में बाल श्रम को बढावा मिलता देख रहे है और उसे अपनी कविता के माध्यम से कह रहे है :
मोदी सरकार का नारा है-
बच्चों से बाल श्रम करवाना है-
कल कारखानों को बचाना है-
बच्चों को मजदूर बनाना है-
पूंजीवाद को बढाना है-
बच्चों का शोषण करवाना है-
मोदी सरकार का...
विदेशी निवेश को बढाना है-
बच्चों के बचपन को दबाना है-
सल्लू बाबा को बचाना है-
बच्चों को अपराधी बनाना है-
ओबामा को क ख ग पढ़ना है-
बच्चों को अनपढ़ बनाना है-
मोदी सरकार का...
Posted on: May 28, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
Many of us worked for digging well for Govt, haven't got payment, please help...
Reshiya Bhai is calling from Temla village and panchayat in Sondwa tehsil of Alirajpur district in Madhya Pradesh and says many had worked in well digging for many days under Govt Kapildhara scheme but are still waiting their wages. This was complained to officials but no one is paying attention. You are requested to call Collector@9926581755 and CEO@9425382922 to solve the problem and help suffering adivasis. Reshiya Bhai@8120659070
Posted on: May 24, 2015. Tags: Reshiya Bhai SONG VICTIMS REGISTER
सुन ऐ मेरी मां, तेरे दर्द से जन्मी हूँ मैं...
उत्तरप्रदेश के कानपुर के मंडला क्षेत्र में एक 4 वर्षीय लड़की के साथ रेप करके उसकी हत्या कर दी गई, जांच चल रही है लेकिन आरोपी फरार है. इस घटना को कानपुर के.एम. भाई कुछ पंक्तियों में सूत्रबद्ध कर प्रस्तुत कर रहे हैं :
सुन ऐ मेरी मां ! तेरे दर्द से जन्मी हूँ मैं-
दर्द मुझकों भी होता है, पर तेरी कोख सा पहरा-
ये समाज नहीं दे पाता है-
मेरी सांसो से ज्यादा कीमती, मेरा जिस्म होता है-
तेरे घर का इन्सान, शैतान से ज्यादा वहसी होता है-
तेरी चौखट पर मेरे साथ बलात्कार होता है-
तेरा समाज ! मुस्कुरा के चला जाता है...
Posted on: May 22, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
सारी उम्मीदों पे मातम छाया...किसानों पर एक कविता
कानपुर, उत्तर प्रदेश से के.एम. भाई किसानों की बदहाली व सरकार के रवैये पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
सारी उम्मीदों पे मातम छाया !
आसमां में रौशनी छाई थी-
और जमीं पे ना जाने कितनी हरियाली-
शायद वो पूर्णिमा की रात थी-
चाँद की रौशनी ने जमीं पे एक सपना सजाया था-
भूखे किसानों को ख़ुशी के आगोश में सुलाया था-
ना जाने क्या-क्या उम्मीद जगी थी-
ढोल-नगाड़े संग पूड़ी की थाल सजी थी-
सहनाई भी बजेगी और बेटी की डोली भी उठेगी-
घर की चौखट पर खुशहाली की किरण दिखेगी-
हमारे घर भी दिवाली और होली मनेगी-
पर कुदरत ने ये कैसा कहर बरपाया-
सारी उम्मीदों पे मातम छाया...
