दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें...कविता
उतरप्रदेश कानपुर से के एम भाई करुणा शानबाग के जन्मदिन पर अपनी एक कविता के माध्यम से श्रधांजलि दे रहे है:
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें-
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें-
अब तो भेड़ियाँ भी चिल्लाती है-
मेरे इन आखों से आंसू की जगह-
लहू कि कतारें बह जाती है-
दुपट्टे का रंग बताता है-
मेरे जिस्म कि कहानी-
दर्द से ज्यादा तकलीफदेह होती है-
लोकतंत्र कि नाजायज जवानी-
भूख नहीं मरती है,मुझे पर तेरे-
नंगे समाज को देखकर मेरी सांसे उखड़ जाती है-
मौत से ये जिंदगी डरती है-
मौत से ज्यादा ये जिंदगी डरती है...
