मईया जी सुनियो हमर विपतिया...गीत-
ग्राम-मानापति, पोस्ट-हठापुर, थाना-बासोपति, जिला-मधुबनी (बिहार) दीपक कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
मईया जी सुनियो हमर विपतिया...
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Posted on: Jan 03, 2021. Tags: BHAJAN SONG VICTIMS REGISTER
ये दुनिया के लोभ लालच में ना जाबे रे मनवा... नागपुरी गीत-
जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से संध्या खोल्खो एक नागपुरी गीत सुना रही है:
ये दुनिया के लोभ लालच में ना जाबे रे मनवा-
दुनिया में पाप आहे पाप से भरल आहे ये दुनिया में-
चारों कोना में चारों में आहे अंधियारा-
दुनिया के चोरी हारी में ना जाबे रे मनवा-
पाप आहे पाप से भरल आहे ये दुनिया में-
चारों कोना में चारों में आहे अंधियारा-
ये दुनिया के लोभ लालच में ना जाबे रे मनवा...(183426) MS
Posted on: Jan 02, 2021. Tags: NAGAPURI SONG VICTIMS REGISTER
समय नके रे भाई मन आत्मा के सिंगरावा...नागपुरी गीत-
जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से संध्या खोल्खो एक नागपुरी गीत सुना रही है:
समय नके रे भाई मन आत्मा के सिंगरावा-
दिन बीतथे रे बहिन मन आत्मा के सजावा-
हायरे दुनिया मिट जा हायरे सुंदर काया मट्टी में मिल जा-
समय नके रे भाई मन आत्मा के सिंगरावा-
येशु के वचन के आवा सुना भैया-
महसी के वचन के दिल में जुगावा-
समय नके रे भाई मन आत्मा के सिंगरावा...(183425) MS
Posted on: Jan 02, 2021. Tags: NAGAPURI SONG VICTIMS REGISTER
देख तेरे संसार कि हालत क्या हो गई भगवान् कितना बदल गया इंसान...गीत
जिला-डिंडौरी (मध्यप्रदेश) से महेंद्र उइके एक गीत सुना रहे हैं-
देख तेरे संसार कि हालत क्या हो गई भगवान् कितना बदल गया इंसान-
चाँद न बदला सूरज न बदला न बदला रे आसमान कितना बदल गया इंसान-
आया समय बड़ा बेढंगा, आज आदमी बना लफंगा-
कहीं पे झगड़ा कहीं पे दंगा,नाच रहा नर होकर नंगा-
छल और कपट के हाथो अपना बेच रहा ईमान... (181113) MS
Posted on: Jan 02, 2021. Tags: HINDI MAHENDRA UIKEY SONG VICTIMS REGISTER
खुद खुश रहे हैं, और ओरों को खुश रखें...कहानी
राजनन्दगाँव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गन्धर्व एक कहानी सुना रहे हैं-
एक बार गुरु नानक जी अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे, तो एक गाँव में रुके गाँव वालों ने उनका बड़ा अपमान किया, तो गुरु नानक जी ने कहा मिल के रहो| और दुसरे गाँव गये वहां उनका बड़ा सम्मान हुआ, तो गुरु नानक जी ने कहा बिखर जाओ| शिष्यों ने पूछा तो नानक जी ने सरल शब्दों में जवाब दिया| कोई भी गंदा वस्तु फैलना नही चाहिए| इसलिए इकट्ठा रहने को बोला| अच्छे लोगों का फैलाव होना चाहिए, जिससे अपने साथ ओरों को भी ज्ञान दे सके| खुद खुश रहे हैं, और ओरों को खुश रखें| (181995) MS
