मेरे लगाए गये पेड़ का फल मेरे आने वाले पीढ़ी के लोग और पशु-पक्षी खायेंगे...कहानी

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं;
एक राजा उसका नाम मानसिंह था वह बडा ही ज्ञानवान धर्मात्मा था, वह प्रतिदिन सभा से लौटने के बाद किसान के वेश में हाथ में कुदाल, फलदार पौधा और पानी के बाल्टी लेकर रोज सड़क के किनारे उन पौधों को लगाता और पौधे में पानी डालने के लिए जड़ के पास मेड भी बनाता था, एक दिन उनके यहाँ एक विदेशी आया, उसे वहां के राजा से मिलना था, पर वह दूसरे दिन मिलना है सोचकर किसी भोजनालय गृह में रुक गया वह शाम के समय अच्छे कपड़े पहन कर घूमने निकल गया, वह उस राजा के पास पहुंचा और बोला बाबा इस उमर में पौधा क्यों लगा रहे हैं, क्या इनका फल आप खा पाएंगे तो उसने जवाब दिया कि अब तक मै दूसरों के द्वारा लगाये गये पौधों के फल को खाते आ रहा हूँ, मेरे लगाए गये पेड़ का फल मेरे आने वाले पीढ़ी के लोग और पशु-पक्षी खायेंगे, विदेशी मन ही मन सोचता हुआ वापस आ गया, दूसरे दिन वह राज दरबार में गया और वह राजा को देखकर आश्चर्य हो गया और बोला मै आपको कही देखा हूँ, राजा ने कहा हाँ देखे होंगे, वह वहां इतना बोलकर चला गया और बाद में बिदेशी को पता चला कि राजा ही थे जो पौधे लगा रहे थे तब वह भी अपने देश में जाकर पौधा लगाने लगा...

Posted on: Sep 11, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER

मान सम्मान पाने के लिए चरित्रवान, गुणवान, विद्यावान, दयावान होना आवश्यक है...

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक लेख सुना रहे है जिसका शीर्षक है भगवान और शैतान : धनवान या राजा महाराजा, मंत्री बन जाने से सम्मान नहीं बढ़ जाता | मान सम्मान पाने के लिए चरित्रवान, गुणवान, विद्यावान, दयावान होना आवश्यक है | धनवान या राजा-का वही पूजा करते है जो उनके संपर्क में रहते है जिन्हें उनसे कुछ पाने की अभिलाषा होती है या जो डरपोक होते है लेकिन चरित्रवान, गुणवान, विद्यावान, दयावान सभी जगह मान सम्मान पाते है और वह आदमी इन्सान कहलाता है और आगे चल कर भगवान भी कहलाता है जैसे ओशो रजनीश, संत कबीर दास, गुरु घासीदास, गुरुनानक।बाकी सब शैतान कहलाते है जैसे रावण और कंस |

Posted on: Sep 11, 2018. Tags: CG KANAHIYA LAL PADIHARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER

जितना मिले उतने में ही संतुष्ट होना चाहिए, लालच नहीं करना चाहिए...एक भूखे कुत्ते की कहानी...

ग्राम-आलमपुर, तहसील-चिचोली, जिला-बैतूल (मध्यप्रदेश) से मोहन यादव एक कहानी सुना रहे हैं: एक कुत्ता भोजन की तलाश में किसी गाँव में गया उसे सूने मकान में आधी रोटी मिल गई वह उसे लेकर आगे बढ़ रहा था, रास्ते में उसे एक नदी मिली जिसे वो पार कर रहा था जैसे ही वो बीच नदी में गया उसको पानी में अपने परछाई के रूप में एक प्रतिद्वंदी दिखाई दिया उसके मुहं में भी एक रोटी थी, फिर कुत्ते के मन में लालच आया और उसने सोचा कि आधी रोटी इसके पास है आधी मेरे पास है, सबको मिला के आराम से खाउंगा इसलिए मै इस पे हमला करता हूँ, जैसे ही कुत्ते ने हमला किया रोटी मुहं से नदी में गिर गई| यानि व्यक्ति को जितना मिले उतने में ही संतुष्ट होना चाहिए, आगे जो उसका नही है उसमे लालच नही करना चाहिए...

Posted on: Sep 06, 2018. Tags: BETUL CHICHOLI MOHAN YADAV MP SONG STORY VICTIMS REGISTER

ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी)

ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से दुर्गुराम कवाची (सरपंच) उनके ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी में बता रहे है कि बहुत समय पहले उनके गाँव के आसपास पूरा जंगल था वहां पर 10-12 घर थे और ओरछा के पेड़ सबसे ज्यादा थे लेकिन वहां पर सरकार ने पूरे ओरछा के पेड़ कटवा दिए तो फिर वहां पर जनसँख्या बढ़ने लगी और उन्ही पेड़ो के कारण उस गाँव का नाम ओरछा रखा गया और यह जानकारी उनके गाँव के बुजुर्गो के माध्यम से मिली |आदिवासी गाँव अक्सर उनके आसपास पाए जाने वाले प्राकृतिक वस्तुओं पर रखे जाते हैं ओरछा को गराड़ी या गर्रा या विषफल भी कहते हैं घरों में बल्ली और खेतों में बागड़ की तरह यह उपयोग में लाया जाता है

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG DURGKONDAL DURGURAM KAVACHI GONDI KANKER STORY

टोपीवाले की चतुराई...कहानी

ग्रामपंचायत-सिहपुर तहसील-पंडरिया, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से संयोगिता मरकाम कक्षा पांचवीं की छात्रा है जो एक कहानी सुना रही है जिसका शीर्षक है टोपीवाले की चतुराई
एक टोपी वाला था, गाँव-गाँव घूम कर टोपी बेचता था, एक दिन वह एक गाँव से दूसरे गाँव टोपियाँ बेचने जा रहा था दोपहर के समय तो वह कुछ देर सुस्ताने के इरादे से एक पेड़ के नीचे अपनी टोपियों को रख कर सो गया, जब नींद खुली तो उसके होश उड़ गए देखा की उसकी एक भी टोपी नहीं है सोचने लगा कौन ले गया होगा? फिर जैसे ही उसकी नजर पेड़ की तरफ़ गई तो देखा कि सारी टोपियों को बंदरों ने पहन रखी है तो वो उन पर इशारों से और पत्थर मार के टोपियाँ वापस पाने की जद्दोजहद करने लगा लेकिन सफलता नहीं फिर उसने देखा कि जैसे वह कर रहा है बन्दर भी वैसा ही कर रहे है तो उसको एक तकरीब सूझी क्यों न अपनी टोपी तो उतार फेंकूं उसने वैसा ही किया उसके बाद बंदरों ने भी अपनी-अपनी टोपियों को उतार कर नीचे फेंक दिए फिर क्या था टोपी वाले ने सारी टोपियाँ उठा कर अपने बैग में भरा और गाँव की तरफ चल पड़ा |

Posted on: Sep 03, 2018. Tags: CG KABIRDHAM PANDARIYA SNYOGITA MARKAM SONG STORY VICTIMS REGISTER

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