माँ की आँचल सबसे सुन्दर- कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
माँ की आँचल सबसे सुन्दर,
माँ का ममता निश्चल,
माँ का लाड प्यार फूलों जैसा,
माँ की गोद फूल सी कोमल,
माँ कभी सोंचती नहीं अपने संतान के ऊपर,
सब कुछ लुटा कर भी बहती रहती वो अभिरल,
सब कुछ लुटा कर भी वो कभी नही रहती खाली,
अपने आँचल के अन्दर रखती कुछ ना कुछ बाली,

Posted on: May 21, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर: काया कल्प चूर्ण का प्रयोग एवं घरेलू उपचार...

प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी काया कल्प चूर्ण का प्रयोग एवं घरेलु उपचार बता रहे हैं| जंगली कोंच का बीज कला 500 ग्राम, आंवला चूर्ण- 200 ग्राम, अश्वगंधा- 200 ग्राम, बरगद के फल का चूर्ण- 200 ग्राम, सतावर- 100 ग्राम, तुलसी बीज- 100 ग्राम, बाबुल की कच्ची फली- 100 ग्राम, सालम पंजी- 100 ग्राम, दाल मखाना- 50 ग्राम, विदारी कण- 50 ग्राम, बरगद का दूध – 50 ग्राम, सफ़ेद मूसली- 100 ग्राम, रजत भस्म- 10 ग्राम, मिश्री-500 ग्राम| इन सबको पीस चूर्ण बना ले| एक एक चमच चूर्ण दिन में 2 बार दूध के साथ सेवन करे| परहेज- मिर्च, मसाला, तेल खटाई, गरिष्ठ भोजन का प्रयोग न करें,नशा न करे| मैदा,शक्कर, नमक का प्रयोग कम करें| अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं: एच डी गांधी@9111061399.

Posted on: May 21, 2019. Tags: CG HD GANDHI HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER

फूलों से नित हँसना सीखो- कविता

ग्राम-निल्कंतपुर, ब्लाक-परतापुर, जिला- सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जगदेव प्रसाद पोया एक कविता सुना रहे है:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना
सीख हवा के झोको से लो, कोमल भाव बहाना
दूध तथा पानी से सीखो, मिलना ओर मिलाना
लता और पेड़ो से सीखो सबको गले लगाना...

Posted on: May 20, 2019. Tags: CG CHHATTISGARH JAGDESH PRASAD POYA POEM SONG VICTIMS REGISTER

बैला ला जोते बर फांदे रहें ओहर ढीला गे...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीगढ़ी कविता सुना रहा है :
का मै कहों संगी जम्मो हर नठा गे-
बैला ला जोते बर फांदे रहें ओहर ढीला गे-
कोपर ला फांदे रहें डांडी हर टूट गे-
सुपी ला धरे रहे और हर गुमा गे-
धान ला बुने रहे ओहू हर बगरा गे-
कोदो ला बुने रहे ओहू हर कचरा गे...

Posted on: May 20, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

नोनी के बेनी मा गुथाये हे मोंगरा के फूल...कविता

ग्राम-तमनार,जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी एक कविता सुना रहा है:
मोंगरा के फूल संगी फुट हवय घुला-घूल-
चारो कोती मह्महावत हे रद्दा जाबे भूल-
नोनी के बेनी मा गुथाये हे मोंगरा के फूल-
ऐति ओति मटकत हवे इसकुरगुजी कस धुल-
हर्रा-पर्रा दिखत हावे कियारी मा फूल-
भंवरा मन झूमत हावे अपन रद्दा भूल...

Posted on: May 20, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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