मुझे इतना शक्ति दे दो हे धरती माँ, कि मै नील गगन से उड़ अऊँ...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मुझे इतना शक्ति दे दो हे धरती माँ-
कि मै नील गगन से उड़ अऊँ-
बादलों से लोहा लेकर फिर जमीं पर लौट आऊ-
पर्वतों से टकराकर चट्टानों को काटकर राह बना सकूं-
फूल बनकर शहीदों के शवों पर स्वागत में इठलाऊ-
मुझे इतना शक्ति दे दो हे धरती माँ-
कि मै नील गगन से उड़ अऊँ...
Posted on: Apr 13, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
एसी शक्ति भर दो माँ, मुझपे कृपा करके माँ...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गीत सुना रहे हैं :
एसी शक्ति भर दो माँ, मुझपे कृपा करके माँ-
बनके पतंग उड़ जाऊं मै-
नील गगन में इठलाऊं मै-
फिर नील गगन के नीचे आ-
धरती में बस जाऊं-
तन मन धन से सेवा करके धरती माँ को सुंदर बनाऊ...
Posted on: Apr 12, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
उठो नई किरण लिए जगा रही नई उषा...कविता-
ग्राम-धुमाडांड, पोस्ट-गोविंदपुर, थाना-चंदोरा, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से बसंतलाल अपने साथी अभिकलाल के साथ एक गीत सुना रहे हैं :
उठो नई किरण लिए जगा रही नई उषा–
उठो उठो नई संदेश दे रही दिशा दिशा–
खिले कमल और अरुण तरुण प्रभात मुस्कुरा रहा–
उठो चलो बढ़ो समीर शंख है बजा रहा–
भविष्य सामने खड़ा प्रशस्त पथ बना रहा...
Posted on: Apr 12, 2019. Tags: BASANTLAL CG POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
क्या इरादा है उनकी कुछ समझ में नहीं आता...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
क्या इरादा है उनकी कुछ समझ में नहीं आता-
5 साल में आते हैं, एक बार, सब कुछ लूटकर ले जाते हैं-
ठगा सा रह जाते हम कुछ भी नहीं बोल पाते-
पीठ पीछे लाख गाली देते हैं-
सामने आने पर हाँ में हाँ भरकर रह जाते हैं...
Posted on: Apr 11, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
धधकता आग भभगता सोला, दिल में लगता बम बारूद का गोला...गज़ल-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गजल सुना रहे हैं :
धधकता आग भभगता सोला-
दिल में लगता बम बारूद का गोला-
हमसा नहीं ये दिल में, दिल से उठता हुआ आग-
जितना डालो पानी उतना उठता है आग-
धुआ की कही नामो निसान नहीं-
फिर भी धुआ धुआ सा लगता है...
