धधकता आग भभगता सोला, दिल में लगता बम बारूद का गोला...गज़ल-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गजल सुना रहे हैं :
धधकता आग भभगता सोला-
दिल में लगता बम बारूद का गोला-
हमसा नहीं ये दिल में, दिल से उठता हुआ आग-
जितना डालो पानी उतना उठता है आग-
धुआ की कही नामो निसान नहीं-
फिर भी धुआ धुआ सा लगता है...
