गरीब मीलों पैदल चलता है भोजन पाने के लिए,अमीर मीलों चलता है उसे पचाने के लिए...कविता
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
किसी के पास खाने के लिए-
एक वक्त की रोटी नही-
किसी के पास एक रोटी खाने के लिए वक्त नही-
कोई अपनों के लिए, अपनी रोटी छोड़ देता हैं-
कोई रोटी के लिए अपनों को छोड़ देता है-
दौलत बचाने के लिए सेहत खो देता हैं...
Posted on: Sep 02, 2018. Tags: CG DURGESH PATEL POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
छत्तीसगढ़ का 26 वां जिला सबले बढ़िया सबले सुंदर, बलरामपुर बलरामपुर...
ग्राम-मिंधारी, पोस्ट-करमडिहा,तहसील-वाड्रफनगर, थाना-बंसतपुर,जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़)से अंजनी नेटी बलरामपुर जिला के उपर एक गीत सुना रही है:
छत्तीसगढ़ कर 26 वां जिला सबसे सुंदर-
सबले बढ़िया बलरामपुर बलरामपुर-
ऊँचा-ऊँचा पहाड़ पर्वत बड़ा ही घन घोर-
हाथी भालू चिरैय चिरगुन करैय बड़ी शोर – हरा- भरा खेत बारी मोहेला मन मोर-
जहाँ घुम के परदेशी डाले ना डेरा...
Posted on: Sep 02, 2018. Tags: ANJANI NETI BALRAMPUR CG SONG SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...कविता
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से प्राथमिक विद्यालय की छात्रा श्वेता मरकाम एक कविता सुना रही हैं:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोंकों से लो कोमल भाव बहाना-
दूध तथा पानी से सीखो मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो सबको गले लगाना-
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना-
पतझड़ के पेड़ों से सीखो दुख में धीरज धरना...
Posted on: Sep 01, 2018. Tags: CG KABIRDHAM POEM SHVETA MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
नि वायने गोटुल तमो ले निय वायने गोटुल रो गोटुल तमो ले...गोंडी विवाह गीत
ग्राम-तोडरुर, विकासखंड-कोयलीबेड़ा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़ ) से कविता कोरचे अपनी सहेलियों के साथ गोंडी भाषा में शादी गीत सुना रहे हैं यह गीत जब लड़का और लड़की को गोटुल के मंडप में नाचते हुए ले जाया जाता है तब गाते हैं:
रे रे रे ला रे रे रे रेला रे रे लयों रे रे रेला रे रे रे रेला-
नि वायने गोटुल तमो ले निय वायने गोटुल रो गोटुल तमो ले-
सिलुड़े पलुड घुती ये सिलुड़े पलुड घुती ये घुती तमो ले-
गोटुल इमो किकी तमो ले गोटुल इमो किकी रो किकी तमो रे-
सिलुड़े पलुड घुती ये सिलुड़े पलुड घुती ये घुती तमो ले-
गोटुल खुदेम आन्दी तमो ले गोटुल खुदेम आन्दी रो आन्दी तमो ले-
सिलुड़े पलुड घुती ये सिलुड़े पलुड घुती ये घुती तमो ले ...
Posted on: Aug 31, 2018. Tags: CG GONDI KANKER KOELIBEDA MARRIAGE SAPNA WATTI SONG
गोटुल में मिलकर हम समस्या निपटाते थे, पारम्परिक नेताओं की मदद से उसको पुनर्जीवित करना है...
ग्राम पचायत-पाड़ेंगा, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव के साथ रैनुराम सलाम गोटुल के बारे में बता रहे है: पहले गोटुल की प्रथा थी पूरे गावं के लोगों के लिए एक मंच था गावं में जो भी समस्या होती थी वहां गाँव के सभी लोग उस गोटुल में बैठ कर समस्या का समधान करते थे | लेकिन आज पहले जैसे गोटुल नहीं रहे, गोटुल का पहले जैसा संस्कृति रीति रिवाज की जो प्रथा थी वो धीरे-धीरे लुप्त होते जा रही है आज हमे लगता है हम पढ़े लिखे हो गये हैं. जरूरत है कि हम अपनी मूल संस्कृति को गोटुल में बैठ कर चर्चा करे, जिससे हमारी भाषा संस्कृति की सुरक्षा बनी रहे | इसलिए अभी गाँव के पारम्परिक नेता जैसे पटेल, गुनिया, मांझी ये सभी मिल कर अभी गोटुल प्रथा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं...


