रे रे रे रेला रे रे रेला रे रे रेला...गोंडी जोहार गीत
ग्राम-दसेडी, ब्लाक-ओढ्गी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से विद्या टेकाम एक गोंडी जोहार गीत सुना रही है:
रे रे रे रेला रे रे रेला रे रे रेला-
जोहार रे जोहार रे मिकुन जोहार रे-
रे रे रे रेला रे रे रेला रे रे रेला...
Posted on: May 07, 2018. Tags: VIDHYA TEKAM GONDI
उर्पल ते उर्पल ते पत्ते केयिता दादा ...गोंडी किसानी गीत
जिला-मलकानगिरी (उड़ीसा) से कोसा मडकामी विज्जा एक गोंडी गीत सुना रहे हैं किसान जब धान बोने की शुरुआत करते हैं तब यह गीत गाया जाता है:
उर्पल त उर्पल त पत्ते केयिता, हो दादा उर्पल त उर्पल त खाती केयिता-
हो दादा मल्लो ते मल्लो ते दाका रोसेला-
रे रे ला रे रे ला रेला रेला, रेरेला रेरेला रेरेला रेला रेरेला-
वेरका त वेरका त उर्पले केयिता हो दादा, वेरका त वेरका त उर्पले केयिता-
हो दादा मल्लो ते मल्लो ते दाका रोसेला-
रे रे ला रे रे ला रेला रेला रेरेला रेरेला रेरेला रेला रेरेला-
गोड़ेल त गोड़ेल त माव केयिता हो दादा-
Posted on: May 06, 2018. Tags: KOSA MADKAMI ODISHA GONDI SONG VICTIMS REGISTER
कलमनि उन मा गांजामनी उन मा पैसा त कीती कीमा नास...नशा विरोधी गोंडी गीत
ग्राम-धावड़ी,जिला-बैतूल (मध्यप्रदेश) से धनराज उइके नशा उन्मूलन गोंडी गीत सुना रहे हैं :
कलमनि उन मा गांजामनी उन मा, पैसा त कीती कीमा नास कलमनि उन मा रो-
पैसा त किती कीमा नास, कलमनि उन मा रो दाई दाऊ आती अपनों धर्म भूले माती-
दाई दाऊ आती धर्म भूले माती, पैसा त कीती कीमा नास कलमनि उन मा रो-
पैसा त कीती कीमा नास, कलमनि उन मा रो ,छवा छुईन जाति अपनों धर्म भूले माती-
छवा छुईन जाति धर्म भूले माती, पैसा त कीती कीमा नास कलमनि उन मा रो-
पैसा त कीती कीमा नास, कलमनि उन मा रो कल उन्जी कुन जीवन बीतेह किती-
Posted on: May 06, 2018. Tags: DHANRAAJ UIKEY GONDI
Today's News from newspapers in Gondi : 6th May 2018-
पत्थलगड़ी घटना के पीछे हैं धर्मांतरण कराने वाले लोग : सीएम रायगढ़ – खुले में खरीद होने से भीगा किसानों को गेहूं : मध्यप्रदेश नईदुनिया – गोबर से बिजली बना रहे हैं इस इलाके के ग्रामीण उद्यमी : हरियाणा करनाल – अच्छा काम करने वाले महिलाओं को मिलेगा स्व कुवरबाई यादव के नाम से इनाम : मुख्यमंत्री ने की घोषणा रायपुर-
Posted on: May 06, 2018. Tags: GONDI NEWS SUMANLATA ACHALA GONDI
लोप्पा लोप्पा तिनमा दादन वेह्चिकान...गोंडी भाषा में कविता :
जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुमनलता अचला गोंडी में एक कविता सुना रही हैं, जिसे शेरसिंह आचला, मनीष हिड़को, सुगदू पोटाई, बालाराम सिन्हा, कु.मनोत्री उसेंडी, लेखसिंह कुलदीप, देवसिंह दर्रो, सोमारूराम गावड़े, प्रेमसिंह कुमेटी और एस.एल.ओगरे ने लिखा है :
लोप्पा लोप्पा तिनमा दादन वेह्चिकान – उचुह्नोर पेकाल, राजन संग उदस तिन्तोर-
ठाली तासयता पड़ेका,पड़ेका तासयता पेय्या-
हुड्डीलोर पेकाल,कड्स -कड्स दायतोर-
नडुम-नडुम मंडा, रंड वड़केंग टोंडा-
दड़िया मेंड रुपयानुंग,लक पर्रनह आयो – दोड़ बूमता लैया वाता,कोकोहने पीला एतिता – वर्रोड़ पेकाल कडिहच-कडिहच,गेतिल हुत्तयतोर – पूयले पुंगार तुन, कोय्य पर्रनह आयो...
