मुझे मत रोको जाने दो, पल दो पल का साथ तुम्हारा...गजल
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक गज़ल सुना रहे है:
मुझे मत रोको जाने दो, पल दो पल का साथ तुम्हारा-
यारो के लिए मै यार हु, रूसहारो के लिए दो धारी तलवार हूँ-
न तीर से तलवार से, न बन्दुक से न तोफों की बौछार से-
मै करता हु जब भी वार, मेरी छोटी कलम की धार से-
न कटा है न कटेगी, काटने वाला खुद कट जायेगा-
उठाकर देख लों पुराना इतिहास-
उसमे लिखा है सब कुछ साफ़ साफ़-
जिसने देस की छवि बिगाड़ने को-
अपनी बुरी नजरो से देखा-
उनकी आँखे खुद ब खुद निकल गया...
Posted on: Mar 15, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
मुझे मत रोको, मुझे जाने दो...कविता
ग्राम तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
मुझे मत रोको, मुझे जाने दो-
पल दो पल का साथ तुम्हारा-
यारो के लिए मै, यार हु-
दुश्मनों के लिए दो धारी तलवार-
हर सिखा को पार कर जाऊंगा-
मरुस्थल में पानी ले आऊंगा-
चाँद, सूरज को धरती पर उतार लाऊंगा-
बंजर भूमि पर सोना उंगाऊंगा-
धरती के सिने को चीरकर-
सुनहरे बालो से धरती को लह-लहलहाउंगा...
Posted on: Mar 11, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : हल्दी के फूल से पीलिया का इलाज
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी से पीलिया रोगी को कैसे हल्दी के पौधे से ठीक किया जा सकता है सुनते है विधि: हमारे आस पास बहुत सारे पेड़ पौधे होते है उन्ही में से हल्दी का पौधा है हल्दी के फूल को पीसकर चावल के पानी के साथ चूर्ण बनाकर खाली पेट तीन दिन तक पीए एक सप्ताह में पीलिया रोग दूर हो जायेगा. गन्ने को चूसकर उसका रस खाने से भी पीलिया रोग ठीक हो जाता है, चिरोठा के पत्ते को तोड़कर लाइए उसे सुखाकर उसे दाल के साथ टमाटर के साथ पकाइए उससे साँस की बीमारी एवं खून साफ़ होता है, ऐसे बहुत सारे पेड़ पौधे है हमारे आस पास हैं लेकिन जानकारी नही होने से हम उनका उपयोग नही कर पाते है, तो आप सुनते रहिये सीजीनेट। पडियारी@9981622548
Posted on: Mar 09, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
रंग और गुलाल की आई खुशी का त्यौहार...होली कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी होली को लेकर एक कविता सुना रहे है:
रंग और गुलाल की आई खुशी का त्यौहार-
आवों दोस्तों मिलजुलकर, जताए सबसे प्यार-
मन में हो जो बैर, भाव उसे भुला गये यार-
उनके गले डाल दे, अपना बाहों का हार-
गाये मिलजुलकर खुशी गीत-
बाजा, ढ़ोल नगाड़ा, नाचे झूम-झूम-
गाए भरत फागुन का त्यौहार-
साल में आता एक बार, लिए बसन्त बहार-
पेड़, पौधे भी नाच रहे देख, खुशी का त्यौहार-
भौरे गुन, गुन कर रहे, देख मधु की बहार-
आवो आँखे में आँखे डाल, युगल करे अपना इज़हार-
केसू पलाश में बाल लाली, आई मद, मस्त बहार....
Posted on: Mar 09, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
धरती कहे अम्बर से मुझे छूलो अपने मुकद्दर से...कविता-
कन्हैयालाल पडियारी ग्राम-तमनार जिला-रायगढ़ छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं:
धरती कहे अम्बर से मुझे छूलो अपने मुकद्दर से-
मेरे पास समंदर हैं अपना प्यास बुझालो-
बादल बनके छा जाओं फिर बूँदे बनकर बरसो-
और धरती माता की प्यास बुझाओ-
तरस रही है धरती माता बूँदों की बौछार करो-
हरियाली राह देख रही हैं तुम्हारे आने की – पलके बिछाई उम्मीदों की दीप जलाकर-
पूरा करो दो उसकी तमन्ना जो भी कर सकते हो...

