राशन का चावल दो महीने से नहीं मिल रहा, सरपंच कहता है शौचालय का गड्ढा खोदो तब मिलेगा...
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बता रहे हैं कि हमारे गांव में पिछले दो महीने से सरकारी उचित मूल्य की दूकान से राशन का चावल नहीं दिया जा रहा है सरपंच का कहना है कि शौचालय का खड्डा खोदंगे तो चावल दिया जायेगा ऐसा कह कर टाल देता है और पड़ोस के ग्राम-घाटपेंडारी के कुछ लोगो को बुलाकर चोरी छुपे चावल देता है इसलिए वे सीजीनेट के सभी साथियों से अपील कर रहे हैं कि इन नम्बरों में बात कर दबाव बनाये जिससे देवरी गाँव के लोगों को राशन का चावल मिल सके... सरपंच@7772911742, S.D.O.@09424166557, कलेक्टर@07775266117. कैलाश सिंह पोया@9753553881
Posted on: Sep 08, 2017. Tags: KAILASH POYA SONG VICTIMS REGISTER
ये उमा काल छीदा...कर्मा गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक कर्मा गीत सुना रहे हैं :
ये उमा काल छीदा-
कहाँ यहाँ पांच वइदा रे – हाँ-हाँ तो ना जो कहाँ जुदा आके-
चेला काहे रेला मांग रे गांजा – सूखी में न धापे न खेत जुआ के-
दरिया में पांच बैला रे-
खेला खेला खेला-
ये उमा काल छीदा...
Posted on: Sep 07, 2017. Tags: KAILASH POYA SONG VICTIMS REGISTER
आज काल मानुष तन फम्फा जिन्दगी लेकर आये...कविता
ग्राम-देवरी, जिला- सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक कविता सुना रहे हैं :
आज काल मनुष तन फम्फा जिन्दगी लेकर आये-
कुकर खाते-खाते नासा पानी में अपन जीवन ला गवाए-
ये नइ सोचे कि माता पिता केतना मेहनत करे-
आज अपन विपत दुःख ला ये मन नइ डरे-
जिन्दगी जिए बर नइ चाहे-
मरे बर चाहथे – डर लाज भये ये मन-
जीवन ला देहे बर बात करथे...
Posted on: Sep 03, 2017. Tags: KAILASH POYA SONG VICTIMS REGISTER
जाग जा आदिवासी भाई रे..कर्मा गीत
ग्राम-देवरी जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया कर्मा गीत सुना रहे है:
जाग जा आदिवासी भाई रे-
मिलजुल के जिन्दगी ला बिताई-
जुट के खाना दाना, जुट के रहना-
जुट के सुमति बनाई रे-
व कम-रकम सरकार योजना ला बनाई-
वही योजना अधिकारी मन ला दबाई-
घर के पीके दारु नशा करत है लड़ाई-
जाग जा आदिवासी भाई रे... एक
Posted on: Sep 02, 2017. Tags: Kailash Poya
यह बात समझ में आई नही, और मम्मी ने समझाई नही...
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया कविता सुना रहे है:
यह बात समझ में आई नही-
और मम्मी ने समझाई नही-
मै कैसे मीठी बात करू, अब मीठी चीजें खाएं नही-
आपा भी पकाती है हलवा, वह आखिर क्यों हलवाई नही-
भाया की मंगनी हो गई कल, क्यों कल ही दुल्हन मंगवाई नही-
यह बात समझ में आई नही...
