पेड़ धरती के सिंगार है...कविता -
भोरमदेव वनांचल, आदिवासी बाहुलक्षेत्र, कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ धरती के सिंगार है-
इसको मत काटो इसमें ममता प्यार है-
गंदा हवा लेकर पीता स्वच्छ हवा यह देता-
पुत्र जैसा इसको मानो वृक्ष के तुम गुन जानो-
एक दिन तुम पक्षताओगे फिर से पेड़ लगाओगे-
इसे प्रकृति का वरदान है इसे भी जीने दो...
Posted on: Dec 04, 2017. Tags: AMIT SAHU SONG VICTIMS REGISTER
नावा सडक म रेंगल कुकरा...छत्तीसगढ़ी गीत -
भोरम वनआँचल, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक गीत सुना रहे है:
नावा सडक म रेंगल कुकरा-
रमन सिंह बाटी तेंदूपत्ता तोड्या ला लुगड़ा-
लुगड़ा हो दीदी लुगड़ा हो बहनी-
सुन हो संगी सुन हो मितान-
विकास के दरा अभियान-
बिंदु काल पड़त है छत्तीसगढ़ म-
चाउर वाले बाबा के चाउर सिरागये...
Posted on: Dec 03, 2017. Tags: AMIT SAHU SONG VICTIMS REGISTER
सबके विकास हवै संगी सब के साथ में...छत्तीसगढ़ी कविता -
ग्राम-भोरमदेव वनांचल, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू मोदी के विकास के बारे एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहें है:
सबके विकास हवै संगी सब के साथ में-
हमर मोदी जी ह हवै सांथ में बुल्टू रेडियों हाथ में-
मोर राज में कोनो भूखा झन रहै पेट भर देहो चावल-
सारे हांथ ला काम देहूं सब-सब ला मिलही आवास-
अपन समस्या के अब रिकार्ड कराहूं गांव में होही अब विकास-
अपन अधिकार ला तुमन ला जानों बुल्टू रेडियों के बात मानों...
Posted on: Dec 02, 2017. Tags: AMIT SONG VICTIMS REGISTER SAHU
मामा न मियाड़े चम्पो पुन्गारे कुवारा लेबे शोभा ता...गोंडी गीत -
जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से सहदेव तुलावी एक गोंडी गीत सुना रहे हैं:
मामा न मियाड़े चम्पो पुन्गारे कुवारा लेबे शोभा ता-
चुडा सीरकुंडा आटुम ने दिया गढ़ी-गढ़ी वेळी अंता-
मिर्चा टमाटर एतलीगे दनता इके अक्के सुड्सी इशारा किनता-
अरे बातंगे एतवेते तुलतरे अंता अरे जुड़ा तो चुगरी चुना तो चुनरी-
जगा जुगते बेलियंता अरे मुजूग टेलाते बेड़ा तिगा लाता-
सुभ लाता पाटाते जल का वाटनता अरे डोरा ना पाटान्ते...
Posted on: Dec 01, 2017. Tags: SAHDEV TULAVI SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ धरती के सिंगार है इसको मत काटो ये ममता का प्यार है...पर्यावरण गीत -
भोरमदेव वनआँचल, जिला-कबीरधाम, (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक पर्यावरण गीत सुना रहे है:
पेड़ धरती के सिंगार है इसको मत काटो-
ये ममता का प्यार है-
गन्दा हवा लेकर पीता स्वच्छ हवा यह देता-
पुत्र जैसा इसको वृक्ष की तुम गुण तो जानो-
एक दिन पछताओगे फिर से पेड़ लगाओगे-
पेड़ धरती के सिंगार है इसको मत काटो...
