पेड़ धरती के सिंगार है...कविता -
भोरमदेव वनांचल, आदिवासी बाहुलक्षेत्र, कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ धरती के सिंगार है-
इसको मत काटो इसमें ममता प्यार है-
गंदा हवा लेकर पीता स्वच्छ हवा यह देता-
पुत्र जैसा इसको मानो वृक्ष के तुम गुन जानो-
एक दिन तुम पक्षताओगे फिर से पेड़ लगाओगे-
इसे प्रकृति का वरदान है इसे भी जीने दो...
