चाहे कौनो सुख बा कौनो शहरिया में, हमरा त नीक लागेला गउआं-जवरिया में...लोकगीत
मालीघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक लोकगीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
चाहे कौनो सुख बा कौनो शहरिया में-
हमरा त नीक लागेला गउआं-जवरिया में-
कुइयां के पानी ठंडा, पीपल के छांव-
न कोई भागमभाग पगडण्डी पर बा पांव-
सबके गाँव में चाचा-काका आशीष देला छन में-
हमरा त नीक लागेला गउआं-जवरिया में-
भउजी के नीक बतिया, हरियर हमार गांव-
भोरे-भोरे सुनाई देला पहरात सब गांव-
कोयल की कूक नीमन लागे, पपीहा के पी पी-
हमरा त नीक लागेला गउवें-जवरिया में...
Posted on: Feb 04, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
ये फैसले का वक्त है तू आ कदम मिला...जनगीत
मुजफ्फरपुर, बिहार से राजू, गुलशन, राहुल,राज, छोटू व अन्य एक जनगीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
ये फैसले का वक्त है तू आ कदम मिला-
ये इम्तिहान सत्य है तू आ कदम मिला-
आसमां से से भोर के सूरज निकल रहे-
आसमां में लाल फरेरे मचल रहे-
मुक्ति कारवां से कारवां मिल रहे-
तू बोल किसके साथ है तू आ जरा बता-
ये फैसले का वक्त है तू कदम मिला...
Posted on: Jan 30, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
चल-चल देखे सखिये, सुंदर दुलहवा सखिये...विवाह गीत
ग्राम-मालीघाट,जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक परिक्षण गीत सुना रहे हैं जो विवाह के समय लड़की पक्ष की और से मडवा पर गाया जाता हैं :
चल-चल देखे सखिये ,चल -चल देखे सखिये – सुंदर दुलहवा सखिये,श्याम रंगवा – देखो पिया के सजनवा सखिये श्याम रंगवा – मति मणि वडिया सोवे लिलरा चंदवा सखिये...
Posted on: Jan 17, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
अस्सी करोड़ मोरा घाघरा सिवा दे....लोकगीत
ग्राम-गिरिवरगंज, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से सुनील कुमार एक लोकगीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
अस्सी करोड़ मोरा घाघरा सिवा दे-
चुनरी मंगा दे मोरा तारा चुनरी-
ताल पे नाचूंगी सारी रात सजना-
एक बार नाचने को कह तो सही-
चोला मैनू तै यार बैठूंगी-
सज-धज करके श्रृंगार बैठूंगी-
ठुमका पे ठुमका लगाऊँ सजना-
एक बार नाम मोरा ले तू सही-
पतली कमर हिचकोला खावेली-
नागिन सी चोटी मोरा लहरावेली-
खन-खन बाजेले मोरे कंगना-
रुनझन पायल बाजेली-
ताल पे नाचूंगी सारी रात सजना-
एक बार नाचने को कह तो सही....
Posted on: Jan 14, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
चला चली घरे रे खेल के बिहान का....छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-चम्पापुर, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से सुनील कुम्हरिया छत्तीसगढ़ी भाषा में एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
चला चली घरे रे खेल के बिहान का-
आदिवासी स्वशासन इहै हमार राजे रे-
राजा रानी उड़त आवे सड़के-सड़क रे-
आदिवासी स्वशासन इहै हमार राजेगा....

