कौने रंगे बछरू रे कोन रंगे गइया...गाय-बछड़े पर किसानी गीत
ग्राम- देवरी, जिला- सूरजपुर ( छत्तीसगढ़ ) से कैलाश सिंह पोया दीपावली पर्व पर गाए जाने वाला एक गीत सुना रहे है जो खेती किसानी में उपयोग होने वाले गाय-बछड़े के बारे में है:
कोन रंगे गइया, कौने रंगे बछरू रे-
कोन रंगे गइया, कौने रंगे बछरू रे-
कौने सिघारी तेल ल लगाबो रे...
Posted on: Nov 18, 2016. Tags: KAILASH SHINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
गेठी कांदा नकवा के खाई, गेठी कांदा लागे दवाई...प्राकृतिक कंद-मूल पर गीत
ग्राम पंचायत देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह पोया प्राकृतिक कंद-मूल पर एक गीत सुना रहे हैं:
गेठी कांदा नकवा के खाई, गेठी कांदा लागे दवाई-
कोन ला भाप ले थे, कोन ला हन बिष ले थे-
कोन ला करत हे पसाई, केकती कांदा लगत हे दवाई-
नकवा के गेठी खाई, हमर देह लगत हे दवाई-
गेठी कांदा नकवा के खाई, गेठी कांदा लागे दवाई...
Posted on: Nov 09, 2016. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
हो पिया भगे डुमरा का फूल केसे रखूं फूल पिया भगे...पारम्परिक गीत
ग्राम-देवरी जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बोल रहे हैं कि आजकल लड़के बच्चे माता-पिता को दाई-दाऊ नहीं बोलते और सुन-सुन के मम्मी-पापा बोलते हैं जो कि पारम्परिक नाम नहीं है जिससे वे दुखी हैं और इसी बात पर फूलों पर उनके किये एक गीत सुनाना चाहते हैं जिससे वे अपने रीति रिवाज के बारे में सीख सकें:
हो पिया भगे डुमरा का फूल केसे रखूं फूल पिया भगे-
अँधा ला दाल भात गीवा डरा काल फूले दो काहेक बैठे-
पिया भगे डुमरी का फूल केसे रखूं फूल पिया भगे
रान्दला दाल भात गीवा डरा का...
Posted on: Nov 08, 2016. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
पिया बड़े बइमान खुदसी-खुद्सी जिव ला लेहे रे...फागुन गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़, से कैलाश सिंह पोया एक परम्परा होली का गीत सुना रहे हैं:
पिया बड़े बइमान खुदसी-खुद्सी जिव ला लेहे रे-
कहाँ छोड़े खंडा मछरी ला कहां हो-
कहां किसान, खुद्सी खुद्सी जिव ला लेहे-
पीया बहर बइमान खुद्सी-खुद्सी जिव ला लेहे-
कहां छोड़े खंडा मछरी कहाँ जग छोड़े कोरा बालक-
पीया बड़े बइमान खुद्सी-खुद्सी जिव ला लेहे...
Posted on: Nov 03, 2016. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
दीपा जला गय रे ऐ-दीवाली के दीप जला गये रे...दीपावली गीत
ग्राम देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला- सूरजपुर, राज्य छत्तीसगढ़ से कैलाश सिंह बता रहे हैं उनके यहाँ दीपावली में लोग सामूहिक रूप से दीप जलाते हैं जहां आसपास के गाँव के लोग आते हैं सब मिल जुल कर के दीप जलाते हैं और आस पास के जगहों में सब गाँव के लोग भ्रमण करते हैं, वे उसी पर आधारित एक गीत गा रहे हैं :
दीपा जला गय रे ऐ-दीवाली के दीप जला गये रे-
दीप जल ला गय रे ऐ-दीप जल ला गय रे ऐ-
दिवाली के दीप जला गये रे-
की मुड मा कलशा, कलशा में पानी-
दीप जला गय रे ऐ, कलशा के ऊपर दीपा जला गये रे...
