तीर धनुष बांसुरी व फूलो के श्रृंगार में...आदिवासी कविता
संताल परगना की पहली आदिवासी कवियत्री आशा सुषमा किसकू की कविता आदिवासियों का संसार को सुना रहे हैं सुनील कुमार:
तीर धनुष बांसुरी व फूलो के श्रृंगार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही संसार में-
श्याम रंग नंगे बदन ,प्रकृति के अंक में-
राजाओ में क्या मिलेगा,छिपा जो इस रंक में-
कीमत इसकी कौन आंके दुनिया के बाजार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
हंसते हंसते इसको चट्टानो से लड़ना आता हैं-
हर विपदा हर बाधा से शेरों से भिड़ना आता हैं-
इतनी तेजी इसके तन में न किसी तलवार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
वृक्षो पत्तो से अच्छादित मिट्टी के मकान हैं-
घेरा जैसे खुला आंगन जैसे खलिहान हैं-
प्रकृति कला नाच दिखाती घर के दिवार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
छल कपट धोखेबाज़ी से ये कोसो दूर हैं-
सीधेपन के कारण सब दिन लुटने को मजबूर हैं-
फिर भी नहीं मिलता रुखापन कभी इसके व्यवहार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
शिक्षा- दिक्षा के अभाव में ,लगी न आधुनिक हवा-
भोगते नित दिन रोग भयंकर इनको नहीं दवा-
बर्तन जेवर रखते गिरवी ,रोगों के उपचार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही संसार में...
Posted on: Aug 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सुनो-सुनो ऐ भारतवासी बिहार की यह अमर कहानी...गीत
प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के द्वितीय सम्मेलन में युवा कवि सुनील कुमार प्रिय पारु, मुजफ्फरपुर से बिहार की अमर कहानी गीत में सुना रहे हैं:
सुनो-सुनो ऐ भारतवासी-
बिहार की यह अमर कहानी-
यह बिहार जो इतना धन्य है-
जहाँ बहता गंगा का पानी-
जहाँ विश्व में था प्रथम गणतंत्र-
यह वह भाग्यशाली राज्य है-
जहाँ भगवान गौतम ने ही-
सबसे पहले दि अपनी वाणी-
यह बिहार जो इतना धन्य है-
सबसे पहले महात्मा गाँधी ने-
आजादी की राह दिखाई थी-
जहाँ हुए थे सात शहीद-
यह वह कुर्बानो की धरती है...
Posted on: Aug 15, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR PRIYA VICTIMS REGISTER
मिदनापुर बंगाल के खुदीराम बोस...खुदीराम शहादत दिवस पर गीत
108 वें शहादत दिवस पर खुदीराम बोस पर समर्पित एक गीत सुनील कुमार मालीघाट जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुना रहे हैं जहां उनको आज के दिन अंग्रेजों द्वारा 19 साल की उम्र में फांसी दी गयी थी :
मिदनापुर बंगाल के खुदीराम बोस-
मुजफ्फरपुर बिहार में फाँसी लगा-
एकबार विदाई दे दो माँ-
हंसते हंसते चूमा फाँसी का फंदा-
क्रांतिकारी बालक था वो ऐसा युवा-
मर के भी भारत में जिंदा हो गया-
लोकगाथा में गाये जाते हैं किस्से-
देश का सपूत तू अमर हो गया-
किंग्जफोर्ड को मारने बंगाल से चला-
धोखा में तू गिरफ्तार हो गया-
19 साल के उम्र में फाँसी चढ़ा-
कुर्बानी देकर सबको सबक दे गया-
आओ आओ सभी पंथ धर्म के लोग-
श्रद्धांजलि दे दे उनको जो सबको भा गया...
Posted on: Aug 11, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
इरोम शर्मिला तूने किया है जो काम, वो भुलाने के काबिल नहीं है...गीत
16 साल से चल रहे मणिपुर की इरोम शर्मिंला द्वारा मानवता की रक्षा के लिए अनशन को स्थगित करने एवं शांति अहिंसा द्वारा आफ्सा कानून का विरोध एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाये कदम के लिए स्वागत गीत:
इरोम शर्मिला तुने किया है जो काम-
वो भुलाने के काबिल नहीं है-
अनथक तूने किया हैं संघर्ष-
वो भुलाने के काबिल नहीं हैं-
महिला का मान बढ़ाया-
मानवता को तूने हैं बचाया-
लोकतंत्र की तुम हो अनुयायी-
आयरन लेडी के रुप में जाना-
आफ्सा कानून को किया तू विरोध-
विकास को किया न अवरुद्ध-
शांति अहिंसा का राह अपनाके-
तूने सबको हैं देश में जगाया...
Posted on: Aug 09, 2016. Tags: SUNIL KUMAR
एक जुट हुए आदिवासी, बोल रहे आदिवासी...विश्व आदिवासी दिवस पर गीत
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सुनील कुमार मुजफ्फरपुर(बिहार) से गीत सुना रहे हैं साथ ही देश और दुनिया के सभी आदिवासी भाई बहनों को शुभकामना दे रहे है :
एक जुट हुए आदिवासी,बोल रहे आदिवासी-
बैगा आदिवासी, गोंड आदिवासी-
कोराकू आदिवासी, मुंडा आदिवासी-
मारिया आदिवासी, संथाली आदिवासी-
सभ्यता संस्कृति को बचाये आदिवासी-
नाचे गाये बजाये सब में आगे हैं आदिवासी-
देश की शान हैं आदिवासी-
देश की प्राण है आदिवासी-
भाषा हैं अलग अलग पर...हो हो हो
मूल है निवासी...

