संदेश रिकार्ड के बाद समस्या का निराकरण हुआ
ग्राम-नवगोई (पाँडवपारा) से कमलेश कुमार जायसवाल जी सीजी नेट के श्रोताओं को धन्यवाद देते हुआ कहते है इनके गाँव में पानी की समस्या थी|गाँव में एक ही नल थी और वह भी 15 महीने से खराब पड़ी थी| इस गाँव में 8 घर और 40 लोग रहते हैं जिनको नल खराब होने काफी दिक्कत हो रही थी|इस कारण इनके द्वारा सीजी नेट में शिकायत दर्ज किया गया था|शिकायत के 15 महीने बाद गाँव में इस समस्या का निराकरण हुआ|अधिक जानकारी के लिए संपर्क नंबर@8889434417.
Posted on: Jan 09, 2022. Tags: KAMLESHKUMAR JAYSWAL NAVGOI PANDVPARA PROBLEM SOLVED WATER
सूरज रे जलते रहना सूरज रे जलते रहना...गीत-
वीरेंद्र गंधर्व, राजनदगांव (छत्तीसगढ़) से एक गीत सुना रहे हैं:
जगत भर की रोशनी के लिए, करोड़ों की जिंदगी के लिए-
सूरज रे जलते रहना ,सूरज रे जलते रहना-
जगत के कल्याण के लिए तू जन्मा है,जगत के वास्ते हर दुख उठा रे-
भले ही अंग तेरा भस्म हो जाए,तू जल-जल कर यहाँ किरने लुटाता रहे-
यही लिखा है तेरे भाग में, तेरा जीवन रहे आग में-
सूरज रे जलते रहना ,सूरज रे जलते रहना...
Posted on: Jan 09, 2022. Tags: CG RAJNADGANV SONG VIRENDRA GANDHRV
करके विनती तोहार ये वीणा वाली...गीत
ग्राम-बजेसरा, ब्लाक-प्रघना, जिला-मऊ (उत्तरप्रदेश) से सुकेत शर्मा एक
गीत सुना रहे हैं:
करके विनती तोहार ये वीणा वाली-
लाग जाई काहो माई लाग जाई का-
हंस के सवारी शोहे वीणा बजावला-
हाथवा में कमल लेके चालले सनवा-
ममता के महादुपा र ये वीणा वाली-
लाग जाई का माई लाग जाई का...
Posted on: Jan 09, 2022. Tags: MAU SONG SUKET SHARMA UP
प्रभु मोर संगी रे हायरे मोर संगी रे...ईशु मसीह गीत-
ग्राम-सिधरौल, जिला-राची (झारखंड) से दीपक एक येशु मसीह गीत सुना रहें है:
प्रभु मोर संगी रे हायरे मोर संगी रे-
तोके माय खोजो ना तोके मै चाहो ना-
आवो प्रभु मोर जीवन में-
तोके माय खोजो ना तोके मै चाहो ना-
आकाश के देखो ना तारे गन के देखो ना-
तोरे याद आवे मोके रे आकाश के देखो ना-
प्रभु मोर संगी रे हायरे मोर संगी रे...
Posted on: Jan 09, 2022. Tags: DEEPAK RACHI ESHU JH MASIH SONG
का मोर भूल होंगे रघु राम रूठ गयें...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम पंचायत-फ़रसवाली, जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़) से संजीव केवट एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
का मोर भूल होंगे रघु राम रूठ गयें-
जेला मानो मोर सहारा वही डाल टूट गयें-
का मोर भूल होंगे रघु राम रूठ गयें-
संगी छुट गयें साथी छुट गये छुट-
गये परिवार जी छुट गये परिवार-
जिये के आशा टूट गये होगे जीव के काल जी...
