Bultoo Radio from Muzaffarpur Bihar in Bhojpuri language : 26th August 2016...
Today Sunil and Mamta is helping us listen to songs and reports from Bihar in this latest edition of Bluetooth radio program in Bhojpuri language also spoken in some districts of the state. Villagers use their mobile phones to record these songs and reports. They call 08050068000 to record. Now this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband or from a download centre nearby. They can also get it from someone with smartphone and internet and then via bluetooth.
Posted on: Aug 27, 2016. Tags: MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR MAMTA VICTIMS REGISTER
बन्नी बैठी है कमरे में, हँसे मन-मन में...बिहारी विवाह गीत
मुजफ्फरपुर, बिहार से उषा देवी एक गीत सुना रही है यह गीत लड़की के विवाह के समय उसके घर में गाया जाता है:
बन्नी बैठी है कमरे में-
हँसे मन-मन में-
सजन घर जाना है-
बन्नों कि मांगों में टीका सोहे-
बछवा लगा के विदा कर दो-
मुआ से गोद भर दो-
सेंदुर से मांग भर दो-
सजन घर जाना है-
बन्नी बैठी है...
Posted on: Aug 24, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
Bultoo Radio from Muzaffarpur(Bihar) in Bhojpuri language: 23rd Aug 2016...
Today Sunil Kumar is helping us listen to songs and reports from Bihar in this latest edition of Bluetooth radio program in Bhojpuri language also spoken in some parts of the state. Villagers use their mobile phones to record these songs and reports. They call 08050068000 to record. Now this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband or from a download centre nearby. They can also get it from someone with smartphone and internet and then via bluetooth.
Posted on: Aug 23, 2016. Tags: MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
तीर धनुष बांसुरी व फूलो के श्रृंगार में...आदिवासी कविता
संताल परगना की पहली आदिवासी कवियत्री आशा सुषमा किसकू की कविता आदिवासियों का संसार को सुना रहे हैं सुनील कुमार:
तीर धनुष बांसुरी व फूलो के श्रृंगार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही संसार में-
श्याम रंग नंगे बदन ,प्रकृति के अंक में-
राजाओ में क्या मिलेगा,छिपा जो इस रंक में-
कीमत इसकी कौन आंके दुनिया के बाजार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
हंसते हंसते इसको चट्टानो से लड़ना आता हैं-
हर विपदा हर बाधा से शेरों से भिड़ना आता हैं-
इतनी तेजी इसके तन में न किसी तलवार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
वृक्षो पत्तो से अच्छादित मिट्टी के मकान हैं-
घेरा जैसे खुला आंगन जैसे खलिहान हैं-
प्रकृति कला नाच दिखाती घर के दिवार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
छल कपट धोखेबाज़ी से ये कोसो दूर हैं-
सीधेपन के कारण सब दिन लुटने को मजबूर हैं-
फिर भी नहीं मिलता रुखापन कभी इसके व्यवहार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही...
शिक्षा- दिक्षा के अभाव में ,लगी न आधुनिक हवा-
भोगते नित दिन रोग भयंकर इनको नहीं दवा-
बर्तन जेवर रखते गिरवी ,रोगों के उपचार में-
रहते मस्त आदिवासी अपने ही संसार में...
Posted on: Aug 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सुनो-सुनो ऐ भारतवासी बिहार की यह अमर कहानी...गीत
प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के द्वितीय सम्मेलन में युवा कवि सुनील कुमार प्रिय पारु, मुजफ्फरपुर से बिहार की अमर कहानी गीत में सुना रहे हैं:
सुनो-सुनो ऐ भारतवासी-
बिहार की यह अमर कहानी-
यह बिहार जो इतना धन्य है-
जहाँ बहता गंगा का पानी-
जहाँ विश्व में था प्रथम गणतंत्र-
यह वह भाग्यशाली राज्य है-
जहाँ भगवान गौतम ने ही-
सबसे पहले दि अपनी वाणी-
यह बिहार जो इतना धन्य है-
सबसे पहले महात्मा गाँधी ने-
आजादी की राह दिखाई थी-
जहाँ हुए थे सात शहीद-
यह वह कुर्बानो की धरती है...

