घुमड़-घुमड़ कर आसमान में देखो मंडराया बादल...झूमर कविता

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से अमन कुमार एक झूमर कविता सुना रहे हैं:
घुमड़-घुमड़ कर आसमान में देखो मंडराया बादल-
आया बादल, आया बादल देखो-देखो बालू काला-
हाथी मोटा दांतों वाला कितने रूप बनाया बादल-
आया बादल, आया बादल...

Posted on: Oct 21, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

महिलाओं को मिलकर शराब बेचने वालों की पिटाई करनी चाहिए जैसा हम लोगों ने बिहार में किया...

मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) में सुनील कुमार के साथ आज उपस्थित है पंच गीता देवी जो बता रही हैं कि ग्राम सभा मुहल्ला सभा के मीटिंग में पंचो के बीच शराबबंदी के लिए बात की पर इस बात को कोई महत्व नहीं दिया गया फिर महिला संगठन में आपसी विचार विमर्श के बाद शराब बेचने वाले लोगो को पकड़ा और महिला संगठन के सदस्यों को मोबाइल से फोन कर एकत्रित किया और शराब बेचने वाले की खूब पिटाई की । वे बता रही हैं कि एकांत में और शौच जाते वक्त महिलाओ को शराबियों के कारण बहुत परेशानी हुआ करती थी पर अब बिहार में पूर्ण शराबबंदी के कारण बहुत सारी महिलाओं की समस्या समाप्त हो गई हैं | वे कहती हैं और प्रदेशों की महिलाओं को भी उनकी तरह पिटाई करनी चाहिए । सुनील@9308571702

Posted on: Oct 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

तू तो नौजवान है इस जगत की शान है...देशभक्ति गीत

जिला-मजफरपुर (बिहार) से सुनील कुमार नौजवानों को समर्पित एक गीत गा रहे है:
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ल लला ल ला लला ल लला लला लला-
तू तो नौ जवान है इस जगत की शान है तेरे दम पे बना देश यह महान है-
पाट तो जमीन पर नफरतों की खाइयाँ दूर हो समाज की सारी
वह बुराइयाँ हौसलों से तेरी सारी विश्व को गुमान है
तू तो नौ जवान है तू तो नौ जवान है-

Posted on: Oct 18, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

नफस-नफस कदम-कदम बस एक फिक्र दम बदम...जनवादी गीत

ग्राम-पुरानी गोदरी इप्टा, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से मुकेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
नफस-नफस,कदम-कदम बस एक-
फिक्र दम बदम घिरे हैं हम सवाल से-
हमे जवाब चाहिए सवाल दर जवाब हैं-
कि इन्कलाब चाहिए इन्कलाब जिंदाबाद-
जहाँ पे अवाम के खिलाफ साजिशे हो शान से-
जहाँ पे बेगुनाह हाथ धो रहे हैं शान से...

Posted on: Oct 17, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

हाय हाय हमरे ई दुरबा पर ठूठ रे बिरिछिया...मुहर्रम गीत

विजयादशमी और मुहर्रम का कैसा अदभुत संयोग । एक शक्ति की अराधना का महापर्व ।दानवत्व पर देवत्व की विजय का प्रतीक और दूसरा अन्याय और अत्याचार के खिँलाफ लडते हुए दो महापुरुषों की शहादत की याद दिँलाने वाला । दोनो का उद्देश्य मगर एक । पर कहां हुई दानवत्व पर देवत्व की विजय,कहां हुआ अत्याचारियों का अंत ? आईए मुहर्रम के अवसर पर इन्ही कुछ सवालों से रूबरू कराता यह मर्सिया गायें और सोचें कि इस स्थिति से उबरने मे हमारा कोई फर्ज नही बनता क्या ?
हाय हाय हमरे ई दुरबा पर ठूठ रे बिरिछिया-
नाहि फूल फल के आसे जी-
ए पर वास करे भूत रे परेतबा-
हड्डिया चबाए खाए मासे जी-
हाय हाय हमरा न बंगला न महल अटरिया उस्सरे-खासर चासे बासे जी-
परती—परतबा न छोडले मुद्द ईया-
ग ईया बिसूके बिना घासे जी-
हाय हाय बडका के घडबा समुन्दर पनिया-
छोटका जे मरे हय पियासे जी-
नाहि मिले रोजी-रोजगार नोकरिया-
घरे घर लोग स निराशे जी-
हाय हाय चानी काटे नेतबा बनिक ठिकदरबा-
ग्रहण लागल हय विकासे जी-
काटेला कुल्हरबा ई गछिआ बिरिछिया-
बेंट लागल जब बांसे जी-
हाय हाय चुप देख कोईली सुगनमा मयनमा-
उलुआ स बनल देख व्यासे जी-
दु:शासन द्रौपदी के रोजे लंगटियाबे-
शकुनी करे अट्टहासे जी...

Posted on: Oct 13, 2016. Tags: Sunil Kumar

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