आज सियाजी के होखेले सगाई अंगना में खरा बाभन मांगले बधाई...बिहारी नेग गीत
सुनील कुमार मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से एक नेग गीत सुना रहे हैं:
आज सियाजी के होखेले सगाई-
अंगना में खरा बाभन मांगले बधाई-
शादी के कराई नेग दीउ सीआ माई-
अंगना में खरा नाई मांगले बधाई-
नहछू कराई नेग दीउ सिआ भाई-
अंगना में खरा मालिन मांगले बधाई-
मउरी बनाई नेग दिउ सिआ माई-
अंगना में खरा डोमिन मांगले बधाई-
डाला बनाई नेग दिउ सिआ माई-
अंगना में खरा चेरिआ मांगले बधाई-
गोर के धुआई नेग दीउ सिआ माई-
Posted on: Sep 12, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
अक्षर से लगलबा सनेइया सजन हमरा...साक्षरता गीत
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर सुनील कुमार मालीघाट जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार ) से एक गीत सुना रहें हैं:
अक्षर से लगलबा सनेइया सजन हमरा-
साक्षर करा दो न साक्षर करा दो हमारा-
कजरा कजरोटा हमरा मन हो न भावे-
कोपिया पेन्सिल ला दो सजन हमरा-
अक्षर से लगलबा सनेइया सजन...
Posted on: Sep 10, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दुनिया गाएगी नया तराना जरुर : अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर गीत
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर सुनील कुमार एक गीत सुना रहें हैं :
आएगा नया जमाना जरुर-
दुनिया गाएगी नया तराना जरुर-
गुलशन बनाएंगे हम उन विरानो को-
रोशन करेंगे हम बुझते चिरागो को ,आएगा...
अपने वतन की हम इज्जत बढ़ाएंगे-
धरती को एक दिन जन्नत बनाएंगे,आएगा...
फिर से सजाएंगे उजड़ती बहारों को-
और फिर हंसाएंगे रोती फिजाओं को, आएगा...
Posted on: Sep 09, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
रह गेली हम त गमार बज्जिका काहे न सिखओल...बज्जिका भाषा में गीत
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार उस इलाके में बोली जाने वाली बज्जिका भाषा में गीत सुना रहे हैं:
रह गेली हम त गमार बज्जिका काहे न सिखओल-
बज्जिका के करबई श्रृंगार, बज्जिका काहे न पढ़ोओल-
हिन्दी इंगलिश खूब सिखाओल-
सब भाषा के मरम बतोओल-
बज्जिका में करबई बिहार...
भेल जनगणना त मुँह ठिकिअओल-
बुरबक बताह सन घंटी डोलओल-
टैम न गमायब बेकार...
बज्जिका के शब्द अर्थ भाव बड़ा निम्मन-
बड़ा ठीक एकर हय रचना व्याकरण-
एकरा से करब खूब प्यार...
एक बज्जिका हय हमर मातृभाषा-
एकरे से पूरत त सब अभिलाषा-
कर एकर जम के प्रचार...
Posted on: Sep 09, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सुन्दरवन के जंगल में कौए की सभा हो रही थी...कौए की कहानी
सुन्दरवन के जंगल में कौए की सभा हो रही थी सभी कौए अपनी बात कांव कांव कांव कर कह रहें थें पहला कौआ ने कहा कि मनुष्य हमारा शिकार क्यों करते हैं, दूसरे कौआ ने कहा मनुष्य तो हमें खाते भी नहीं फिर क्यों करते है शिकार हम सबका ? तीसरे कौआ ने कांव कांव कर कहा हो सकता हैं मनुष्य अपने पालतू कुत्ता को खिलाने के लिए हमारा शिकार करते हों इसी बीच-कुछ कौए ने कहा हमलोग यह स्थान को छोड़ देते हैं समझदार कौआ कहा हमें एक जुट होना होगा-समझदार कौआ की बात सुन सभी कौए सोच में पड़ फिर शिकारी आया सभी कौआ एक साथ समझदार-कौआ का इशारा पा कर हमला कर दिया .अचानक हमला से शिकारी भागने लगा -फिर दुबारा शिकारी कभी उस जंगल में नहीं पहुँचा क्योंकि उसे समझ में आ गया था की यहाँ के कौए एकजुट हो गये हैं...
