माँ को मनाने में बड़ा मजा आता है...गीत -
मंदाकनी मिश्रा ग्राम-छुल्कारी, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से माँ और भक्त के बारे में एक गीत सुना रही है:
माँ को मनाने में बड़ा मजा आता है-
माँ चन्दन बनी हम पानी बनी-
लग जाने में बड़ा मजा आता हैं-
माँ तू दीपक बनी हम तो बाती बनी-
जल जाने में बड़ा मजा आता हैं-
माँ तू माखन बनी हम मिश्री बनी-
भोग लगने में बड़ा मजा आता हैं-
माँ को मनाने में बड़ा मजा आता हैं...
Posted on: Jan 26, 2018. Tags: MANDAKINI MISHRA SONG VICTIMS REGISTER
खूब नक़ल के करे प्रचार, दर मा लड़का चार हजार...नक़ल पर बघेली में हास्य कविता
ऋषभ मिश्र ग्राम-ओझापुरवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से परीक्षाओं में हो रही नक़ल पर एक बघेलखंडी बोली में एक हास्य कविता सुना रहे हैं:
खूब नक़ल के करे प्रचार-
दर मा लड़का चार हजार-
कहिन कि तुहका पास कराउब-
चाहे कउनऊ विधि अपनाउब-
इत्ते मा तू पास न होवे-
पुनः मूल्यांकन फॉर्म भराउब-
अगर चेकर जो आवे पईहें-
तुरतये फॉर्म भराईन लेइहैं-
सौ-सौ के नोट सबै का दीन्हे – भरके पेट नक़ल कई लीन्हें – कहीं कि नातिन भरी आई-
एक सरहज एक सारी आहिं – तुहो लिखें ददुआ का दीन्हें – पहिले सेट मिलाइन लीन्हें -2
अथवा वथवा सब कई आय-
खूब नक़ल के करे...
चपरासी से पानी मंगावे-
चपरासी चुटका धई लावे-
खूब नक़ल के करे...
Posted on: Dec 28, 2017. Tags: Rishabh Mishra SONG VICTIMS REGISTER
अब देश को बेटियां कितनी खटकती है...कविता
ऋषभ मिश्र ग्राम-ओझापुरवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं:
दृश्य ऐसा देखकर सांसे लटकती है-
फल नही अब पेड़ पर लाशें लटकती हैं-
वासना की ये सुनामी चीखकर कहती है-
सभ्यताएं रस्ते कैसे भटकती है-
मान-मर्यादा सुरक्षा प्यार सब गायब-
अब देश को बेटियां कितनी खटकती है-
चीख आंसू, जुल्म शोषण जातियां,ब्याह – आज आँगन में मटकती हैं-
आज तक पिघला नहीं है-
दिल दुआओं का चाहते-
चाहते कितना चरण सिर पटकती है-
सिर्फ आधी रात को माँ ही बताएगी-
बाप की ये हड्डियाँ कैसे चटकती हैं-
बादलों की आँख में जब शर्म दिखती है-
तब कहीं इस खेत में खुशियाँ फटकती हैं-
दौलत से सांस दंदे पेट भरती है-
गोलियां सल्फास की-
बहुएं गटकती हैं-
वक्त बदला है अभी तुम देखते जाओ-
दूर घड़ियाँ हाथ से क्या-क्या झटकती हैं...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: Rishabh Mishra SONG VICTIMS REGISTER
कहीं नहीं जाना यहीं चली आना...भक्ति गीत
शैलजा मिश्र जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक भक्ति गीत सुना रही हैं:
कहीं नहीं जाना यहीं चली आना-
कहाँ की तैयारी है वो माँ शेरावाली है-
तेरे दुवारे मैया एक लंगड़ा पुकारे-
लंगड़े को पैर देना माँ अरज हमारी है-
तेरे दुवारे मैया बाँझन पुकारे-
बाँझन को पुत्र देना माँ अरज हमारी है-
तेरे दुवारे मैया अंधा पुकारे-
अंधे को आँख देना अरज हमारी है-
कहीं नहीं जाना...
Posted on: Dec 07, 2017. Tags: SONG Shailja Mishra VICTIMS REGISTER
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले...भजन गीत -
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मंदाकनी मिश्रा एक भजन गीत सुना रहें है :
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले – गोविंद नाम लेकर मेरे प्राण तन से निकले – श्री गंगा जी का तट हो यमुना का बंसी वट हो – मेरा सावरा निकट हो जब प्राण तन से निकले – विष्नू चरण का जल हो जब प्राण तन से निकले – सिर सोहना मुकुट हो मुखड़े पे काली लट हो...
