मगर उनमें तुम तो कहीं भी नहीं दिखते, चेयरमैन माओ...

चेयरमैन माओ
प्रिय माओ, जोहार!
एक समय था,
जब सड़कों की दीवारों पर पैबंद रहता था
चीन का चैयरमैन हमारा चेयरमैन
हसंते थे कुछ लोग
कुछ देते थे गाली भी

मैं नहीं जानता, माओ !
वो ठीक थे या ये
मगर आज कुछ ठीक नहीं है तेरे बगैर

चीन में सब बदल गया,
मगर नहीं बदला, तो मजदूरों की बदलती हुई किस्मत

आज झारखंड में तुम्हारे और गांधी के गाने वाले
हर दिन सड़कों पर मिल जायेंगे
मगर उनमें तुम तो कहीं भी नहीं दिखते

झाड़खण्ड से बिरसा को भी देश निकाला दे दिया है
मगर बिरसा के गीत हर बार बज जाते हैं
बिरसा और तुम्हारे लोग
बहला दिये गये हैं
वो जानते हैं चेग्वेरा व तुम्हारे टीशर्ट पहनने वाले
फ्रेंच कट दाढ़ी वाले
सिगरेट हाथों में लिये
रोज तुम्हें बेच आते हैं वल्र्ड बैंक के हाथों

फिर भी खोज रहे हैं तुम्हें
वे लोग
तेरी रचनाओं से दूर
उनकी सपनों की दुनिया में
एक चेहरा है
जो तुम्हारी तरह ही लगता है

और
अंधेरे में झलक उठता है हर चेहरा
जिस पर लिखा होता है
हां! चुप रहो,
कुछ नहीं होगा तुमसे
झोला उठा लो तो अपना
अपना और सिर्फ अपना
चीन का चेयरमैन हमारा चेयरमैन

अलोका कुजूर

Posted on: Dec 01, 2010. Tags: Aloka

मूढ़ी का पाइला

लगती है अच्छी
मूढ़ी वाली
चार पाइला मूढ़ी के बाद
भरी पोलोथिन मूढ़ी में
उपर से डाल देती है
एक मूट्ठी मूढ़ी

हालाकि यह चगनी मंगनी है
कि चार पाइला
मूढ़ी में थोड़ा हिल जाने पर
कुछ मूढियां गिर जाती है

ऐसा नही है
पाइला का माप कम हो जाता
फिर भी वो डाल देती है
उस पोलोथिन में मुट्ठी भर मूढ़ी

जैसे विवाह के बाद
बेटी की विदाई के वक्त
मां मुट्ठी भर चावल, हल्दी और दूब
खोइछा देती है बांध

यह थोडा सा नहीं होता हैं
इसमे
प्यार आत्मीयता और गर्माहट होती है
शुभकामनाओं का
अनन्त संसार होता है

मुट्ठी भर प्यार
मुट्ठी भर गर्माहट
बस अब
मुट्ठी भर बचे हैं
अच्छे लोग।

अलोका कुजूर

Posted on: Dec 01, 2010. Tags: Aloka

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