हमारे गाँव का नाम रेंगावाही कैसे पड़ा : एक गाँव की कहानी (गोंडी भाषा में)
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-रेंगावाही, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां मोहन यादव की मुलाक़ात गाँव के बुजुर्ग गांडूराम धुर्वा से हुई है जो उनको उनके गाँव का नाम रेंगावाही कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी भाषा में बता रहे है वे कह रहे हैं कि पहले के ज़माने में उनके गाँव में बहुत ज्यादा रेंगा (बेर) के पेड़ हुआ करते थे जिसको काटकर यह गाँव बसाया गया है उसी के कारण उनके गाँव का नाम रेंगावाही पड़ा | उनको यह जानकारी उनके दादी दादा के माध्यम से पता चला ऐसा वे बता रहे है|
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG GANDURAM DHURVA GONDI KANKER KOELIBEDA
अले जाति भाति पोरी येलो ले...गोंडी गीत
ग्राम-उलिया, तहसील-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुमित्रा तिमा गोंडी गीत सुना रही है:
रेला रेला रेला रे रे रेला रे रे ला-
सले रेला रे रे रेला – अले जाति भाति पोरी येलो ले-
कुवे ले ले ले कुवे ले-
सले ले ले ले कुवे ले अले – जाति बाति पोरी येलो ले-
कुवे ले ले ले कुवे ले-
ताना ओना जोड़ी येलो ले...
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG GONDI KANKER KOELIBEDA SONG SUMITRA TEEMA
तिना नामोर नानो रे नानो रे ये ये ये...गोंडी गीत...
ग्राम पंचायत-ताडवाली, विकासखण्ड-कोयलीबेडा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से गणेश आयाम के साथ गाँव के ग्रामीण गोंडी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
तिना नामोर नानो रे नानो रे ये ये ये-
गायतन लोनु वेहट रा लयोरी-
पुनवाय माने बुम तोर रा लयोरी-
ढोलता नुकंग बाते रा लयोरी-
बस्तर बुम ता आन्दोम रा लयोरी –
पुनवान्क पुछे मायतोरोम लयोरी-
वेहोम आयो वेह्तोम रा लयोरी...
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG GANESH AYAM GONDI KANKER KOELIBEDA SONG
Today's news from newspapers in Gondi : 5th September 2018...
झारखंड से ईसाई बनाने के लिए पंजाब लाए जाते हैं बच्चे, 4 बरामद, 10 की तलाश जारी-नेशनल-
मध्यप्रदेश:आदिवासी संगठन जयस का ऐलान, विधानसभा चुनाव में 80 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार- न्यूज़ 18-
छत्तीसगढ़ : स्कूली बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए अंडे और दूध देने का प्रस्ताव- नईदुनिया-
छत्तीसगढ़ : अटल विकास यात्रा का 5 सितंबर से आगाज, भाजपा के शाह डोंगरगढ़ में दिखाएंगे हरी झंडी-दैनिक भास्कर – बस्तर : भोरमदेव सेंचुरी के काेर एरिया को अबूझमाड़ बनाना चाहते हैं नक्सली- दैनिक भास्कर-
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: GONDI NEWS RAMESH KUNJAM
ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी)
ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से दुर्गुराम कवाची (सरपंच) उनके ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी में बता रहे है कि बहुत समय पहले उनके गाँव के आसपास पूरा जंगल था वहां पर 10-12 घर थे और ओरछा के पेड़ सबसे ज्यादा थे लेकिन वहां पर सरकार ने पूरे ओरछा के पेड़ कटवा दिए तो फिर वहां पर जनसँख्या बढ़ने लगी और उन्ही पेड़ो के कारण उस गाँव का नाम ओरछा रखा गया और यह जानकारी उनके गाँव के बुजुर्गो के माध्यम से मिली |आदिवासी गाँव अक्सर उनके आसपास पाए जाने वाले प्राकृतिक वस्तुओं पर रखे जाते हैं ओरछा को गराड़ी या गर्रा या विषफल भी कहते हैं घरों में बल्ली और खेतों में बागड़ की तरह यह उपयोग में लाया जाता है

