देश की माटी देश का जल...कविता-

सीजीनेट के साथी विवेक सभी को रक्षाबंधन बंधन और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुये एक कविता सुना रहे हैं:
देश की माटी देश का जल-
हवा देश की देश का फल-
सरल बने प्रभु सरल बने-
देश के घर और देश के घाट...

Posted on: Aug 15, 2019. Tags: POEM VIVEK

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