हमारे गाँव में मिडल स्कूल तो खुला है पर उसमे एक ही शिक्षक है और वह भी अक्सर गायब रहती है...

हमारे गाँव में इस साल मिडल स्कूल शुरू हुआ है पर उसमे सिर्फ एक ही शिक्षक है और वह भी अनियमित है बता रहे हैं ग्राम-पोड़ीबहार, विकासखंड-मवई, जिला-मंडला मध्यप्रदेश से रविकांत शाह पंद्रे। वे बता रहे है कि उनके गाँव में कक्षा 6 वी से लेकर कक्षा 9 वी तक इस वर्ष से स्कूल संचालित है और उसमे करीब 200 बच्चे अध्ययनरत है और वहां पर एक ही मैडम है और वो भी समय पर स्कूल नहीं आती है और अक्सर गायब भी रहती हैं जिसके कारण बच्चो की पढाई नहीं हो पा रही है, इसलिए सीजीनेट के साथियों से मदद की अपील कर रहे है, कि वे विकासखंड शिक्षा अधिकारी@7888514233, जिला शिक्षा अधिकारी@7898502333, कलेक्टर@ 9977742118 से बात कर बच्चों की मदद करें । रवि@9691317966

Posted on: Dec 22, 2016. Tags: RAVIKANT PANDRE SONG VICTIMS REGISTER

मेरा बिहार, मेरा बिहार, मेरा बिहार...बिहार राज्य गीत

रवि वर्मा मालीघाट जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार ) से उनके राज्य बिहार पर एक गीत सुना रहे हैं:
मेरा बिहार, मेरा बिहार, मेरा बिहार-
ये बिहार है इसकी माटी-
चन्दन की पावन है-
ये बिहार है इसकी माटी...

Posted on: Dec 17, 2016. Tags: RAVI VERMA SONG VICTIMS REGISTER

सुआ बोलथे रे हाय जी, हाय सुआ बोलथे यार...सरगुजिहा लोकगीत

ग्राम पंचायत धूमाडांड सूरजपुर छत्तीसगढ़ से सूरदास आर्मो एक क्षेत्रीय बोली में गीत सुना रहे हैं :
सुआ बोलथे रे हाय जी, हाय सुआ बोलथे यार-
पिंजरा के बंधल सुआ बोलथे जी-
हाय जी हाय सुआ बोलथे यार-
पिंजरा के बंधल सुआ बोलथे जी-
गाँव घर में खेत खानिहार संग
साथी मिले हम तो गाए रहें जी-
गहरा नदी के पानी जल थला गाए रहे जी-
हाय जी हाय गाना गाए रहेन जी-
पानी के पिवयया जल छान के पियें जी...

Posted on: Dec 16, 2016. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं उसकी मम्मी...भजन गीत

ग्राम-धुमाडांड भगतपारा, विकासखंड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर छत्तीसगढ़ से कुमारी आरती आयाम भजन गीत सुना रही हैं :-
रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं उसकी मम्मी-
की गोद लालाराते नहीं उसके पापा दया बर-
बी लेते नहीं रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं-
उसकी बुआ की गोद लालाराते नहीं-
रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं

Posted on: Dec 02, 2016. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन...बाल शिक्षा पर कविता

ग्राम छत्रपुर, विकासखंड घुघरी, जिला मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी उन ग्रामीण बच्चों जो बचपन से ही स्कूल नही जाते है उन पर एक कविता सुना रहे हैं:
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
ट्रेन में ढूढ़ता कबाढ़ है, होटल में है बर्तन धोता-
जूतों पर पलिस करता, सडको पर बोझ ढ़ोता-
जंगल-जंगल ढोर चराता, फिरता मारा-मारा बचपन-
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
खेती-खलियाने में, खट खटता जाता है सारा बचपन-
पुरखों से मृध लिया उसी को काट रहा बेचारा बचपन-
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
काम सीखना, ढोर चराना, भात बनाना, बुरा नही है-
ख़ुशी-ख़ुशी सरल कामो, हाथ बाटना बुरा नही है-
लेकिन शिक्षा से दूर हटाना बहुत बुरा है-
श्रम लेकर सरल बनाना, उन्हें फ़साना बुरा है-
पढ़ते-पढ़ते काम सीखते, तो हो जाता न्यारा बचपन-
ढूढ़ रहे है सारे बच्चें, कहा खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
आवाज इसमें अभी अंजाम मत चाहो-
इन्हें पढ़ाओ आज इनसे काम मत चाहो-
फलने दो फूलने दो खुशियों के बेल को-
मासूम है अभी इनका अभी से दाम मत चाहो...

Posted on: Dec 01, 2016. Tags: MOHAN MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

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