तोला बंदत हो दिन रात मोर धरती मईया...देशभक्ति गीत
ग्राम-अलका, पोस्ट+थाना-चलगली, विकासखण्ड-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से दिलीप कुमार एक देशभक्ति गीत सुना रहे हैं:
तोला बंदत हो दिन रात मोर धरती मईया-
सूत-सूत के पाव पखारो सुन मोर धरती माँ-
तोला बंदत हो दिन रात मोर धरती मईया-
तोला उठ सूत के बखान करो रे मोर शिव गुरु-
तोला बंदत हो दिन रात जय होये तोर-
तोला बंदत हो दिन रात मोर धरती मईया...
Posted on: Sep 20, 2018. Tags: BALRAMPUR CG CHHATTISGARHI DILEEP KUMAR PATRIOTIC SONG VICTIMS REGISTER WADRAFNAGAR
आधा पेट खा के बेटा तोला भर पेट खवाएं गा...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
मोर दुलारू बेटा गा मोर दुलारू बेटा गा-
दस महिना कोख मा धरके तोला मै जन्मायों गा-
अपन लहू ला गोरस बनके तोला मै पियायों-
अपन जिन्दगी ला दांव लगाके तोर जिन्दगी ला सँवारे गा-
आधा पेट खा के बेटा तोला भर पेट खवाएं गा-
मोर बुढ़तकाल के सहारा होबे कहिके पातेयों गा...
Posted on: Sep 20, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
सकालू मांझी हर बड़खा लकड़ी ला फ़ोरत रहिस...छत्तीसगढ़ी कहानी
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कहानी सुना रहे है : सकालू मांझी हर बड़खा लकड़ी ला फ़ोरत रहिस, ओहर लकड़ी के माझरे-माझर मोट ला मारे लकरी कभूच नई फूटे ओहार टूटकाये-टूटकाये फोरेच भर धरिस तबोच ले नई फुटिस अउ डोकरी दाई हर होहिच करा धान ला बगराये रहिस ओला कुकरी मन खाए बर आये डोकरा दादा हर टगनी का धर के होहिच करा बेठे एहिस अउ सारे कुकरी सा सारे कुकरी सा तीर-तीर ला खा डोकरा दादा भगाए बर लगे है ओ लकरी ला फोरेच है तबो ले नई फूटे फिर डोकरा दादा कहे सा सारे कुकरी सा तीर-तीर ला खा...
Posted on: Sep 19, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
मोला दगा दिये दगा वाली ओ, तै खाले कमाले मजा उडाले का नजर भर देख तो लेले...गीत-
ग्राम-कोटया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक एक गीत सुना रहे हैं :
मोला दगा दिये दगा वाली ओ, तै खाले कमाले-
मजा उडाले का नजर भर देख तो लेले-
सजा के रुख मा बैठे हे खुसरा, हमर पीरत बने रही का करबो दूसरा-
बोहावत के नरवा मा लेहे पड़वा, हय-
तोर दमके जवानी गड़ाले मडवा-
मोला दगा दिये दगा वाली हो तै खाले कमाले...
Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI MEWALAL DEWANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
बकरी चराने वाले समारू और मंगलू उरांव की छत्तीसगढ़ी कहानी...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं: चिर्रू नाम का एक उरांव रहता था, उसके दो बेटे थे जिसका नाम समारू और मंगलू जिसमे सम्हारु बहुत होशियार था, मंगलू होशियार नही था, चिर्रू खतम हो गया और उसके पत्नी वृद्ध हो गई घर के सभी जिम्मेदारी दोनों भाई के ऊपर आ गया| वे दोनों गाँव के बकरी चाराने लगे एक दिन समारू, मगलू से कहा जा रे बकरियों को चारा-चराकर ले आओ, वह थोड़ा चना रखा और चला गया मंझनिया के समय बकरियों को पानी पिला के और महुआ के छाया में सो गया, बकरी बैठ के चारा को पागुर ले रहे थे मंगलू अपने मन में विचार किया, ये बकरी मुझे लड़ने को कह रहे हैं, ये सोचकर जंगली पासा में सभी बकरियों के मार दिया सभी बकरी मर गये, और वे घर वापस अ गया समारू, मंगलू से पूछा बकरियाँ कहाँ हैं, बताया वो मुझे लड़ने के लिए चगली कर रहे थे तो मै उन्हें पासा से मार दिया, फिर मंगलू सोचा कि बकरी हमें नही छोड़ते और वह जाके सभी बकरी को भुदरा में ले जाके छुपा दिया और बकरियों के मालिकों को कह दिया सभी बकरियों को (बिग्वा) चीता खा गया, सभी लोग अपने-अपने बकरियों को खोजने गये, लेकिन एक भी नही पाए सभी मालिक चुपचाप रह गये, अर्थात ये कि व्यक्ति को हमेशा होशियार रहना चाहिए:
