आजादी हो आजादी पूंजीवादियो से आजादी...आजादी गीत -
जिला-दंतेवाडा (छत्तीसगढ़) से सूर्य भाई एक आजादी गीत सुना रहे है:
आजादी हो आजादी पूंजीवादियो से आजादी-
ब्राम वादियों से आजादी भ्रष्टाचारियो से आजादी-
लुटेरो से आजादी, आजादी हो आजादी-
यहाँ के आदिवासियों की आजादी हो-
बस्तर में आजादी हो बस्तर में आजादी-
इस देश में भ्रष्टाचार मिटाओ पूंजीवाद को भगाओ...
Posted on: Nov 12, 2017. Tags: SONG SURYA BHAI DANTEWADA VICTIMS REGISTER
ट्रांसफार्मर के लिए 3 साल पहले अप्लाई किया था अधिकारी 1 लाख रू घूस मांगते हैं, नहीं लगा है...
ग्राम-बजराहपूर्वा, पंचायत-मालो, विकासखंड-चौबेपुर, जिला-कानपुर (उप्र) से KM भाई के साथ में राजेंद्र सिंह बता रहे है कि उन्होने 2014 में नए विद्युत ट्रांसफार्मर कनेक्शन के लिए अप्लाई किया था J.E. द्वारा 1 लाख रूपये घूस माँगा| लेकिन घूस न देने की वजह से आज तक इनका काम नहीं हुआ| इसके लिए इन्होने उच्च अधिकारियों के पास शिकायत किया पर कोई कार्यवाही नहीं हुई | इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद की अपील कर रहे है कि इन अधिकारियो से बात कर मदद का अनुरोध करें : चौबेपुर E.E.@9415909006, विद्युत वितरण खंड आगरा M.D.@5622605699, 5622601316, C.E.@9412748019, उर्जा मंत्री@01123717474. KM भाई@8756011826.
Posted on: Nov 04, 2017. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
उम्मीद भरा एक दिया...
कच्चे हाथों की खातिर-
बिखरे रंगों की खातिर-
उम्मीद भरा एक दिया – बहती नदियों की खातिर-
सूखी फसलों की खातिर-
उम्मीद भरा एक दिया-
बनते–बिगड़ते अफ़सानों की खातिर-
टूट चुके अरमानों की खातिर-
उम्मीद भरा एक दिया – बुझते हुए सपनों की खातिर-
उम्मीद भरा एक दिया-
मरे हुए लोकतंत्र की खातिर-
उम्मीद भरा एक दिया ….
सभी की खुशहाली की खातिर
उम्मीद भरा एक दिया...
Posted on: Oct 19, 2017. Tags: KM BHAI
आबे तै आबे गोरी ओ...कर्मा गीत-
ग्राम-धनवली नवापारा, पोस्ट-अधवानी, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से विष्णु भैना एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
आबे तै आबे गोरी ओ – हामर गांव मा कर्मा होवथे-
कदम तरी छाव मा नेवरी हमर गांव मा-
भैया भौजी मिल के संगी नाचत है कर्मा-
मयूर पंख लगा के संगी मादर के सुर मा-
तय हा ददरिया गावे मैं तोरे संग गाऊं-
औ नाच लेब दोनों संग मा-
आबे तै आबे गोरी ओ...
Posted on: Sep 09, 2017. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VISHNU KUMAR BHAINA
मजबूरी का मजदूर, मजदूर की जिंदगानी...कविता
कानपुर (उत्तरप्रदेश) से के.एम. भाई एक कविता सुना रहे हैं :
मजबूरी का मजदूर-
कभी अन्न तो कभी तन-
कभी भूख तो कभी दर्द-
कभी दवा तो कभी नशा-
कभी लाज तो कभी हया-
कभी सांस तो कभी जुआ-
मजबूरी का नाम मजदूर हुआ-
कभी गरीबी तो कभी बिमारी-
कभी बेबसी तो कभी लाचारी-
हर मजदूर की यही कहानी-
मजबूरी ही है हर-
मजदूर की जिंदगानी-
मजदूर की जिंदगानी ...
