मगरमच्छ, हाथी और बिहार में कोनहारा के पशु मेला की कहानी...
एक समय की बात हैं (कोन्हारा) गंगा के किनारे हाथी स्नान कर रहे थे तभी पानी के अन्दर से एक मगरमच्छ आया और हाथी के पैर को पकड के खीचने लगा हाथी ने बहुत प्रयास किया बाहर निकलने के लिए पर नही निकल पाया | कहा जाता है कि पानी के अन्दर मगरमच्छ की ताकत सौ हाथी के बराबर होती है इस तरह से हाथी अन्दर चला गया फिर हाथी भगवान् को याद करते हुए भक्ति किया माना जाता है भक्ति करने से भगवान् दौड़े चले आते है इस प्रकार से भगवान विष्णु के दर्शन हुए और उन्होंने मगरमच्छ का वध किया | इसी जगह बिहार में कोन्हारा का प्रसिद्ध पशु मेला लगता है प्रति वर्ष एक माह यह मेला चलता है, जहा अधिकांश व्यपारियों का आना-जाना लगा रहा है सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Feb 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
साक्षर होगी माँ बहने सरकार का ऐलान है...साक्षरता गीत
साक्षरता पर चल रहे सरकार की “अक्षर आँचल” योजना के बारे में गीत सुना रहें है सुनील कुमार मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से:
अक्षर आँचल अभियान हैं साक्षरता पैगाम है-
साक्षर होगी माँ बहने सरकार का ऐलान है-
उठो बहना देर न कर पढ़ने से तू अब न डर-
ये अक्षर का मेल हैं ये अंको का खेल हैं-
सबको पढ़ना लिखना होगा, हिंदू या मुसलमान हैं-
जो महिला पढ़ जाती हैं दुनिया में इज्जत पाती हैं-
पढ़ी लीखी माँ होती हैं बच्चों को खुद पढ़ाती है-
छोड़ो बीती बातें अब तो नारि पुरुष समान हैं-
दु:ख का सूरज ढ़ल गया अब नया सवेरा आया है-
आधी दुनिया नारी हैं तो आधी हिस्सेदारी हैं-
बिहार की बेटी पर तो इस देश को गुमान हैं...
Posted on: Jan 31, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
तेरे साथ वो गुजरा लम्हा तेरे साथ वो गुजरा लम्हा...कविता
ग्राम मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार कवि मिलन सिंह की एक कविता सुना रहे है:
तेरे साथ वो गुजरा लम्हा तेरे साथ वो गुजरा लम्हा-
आज भी मेरी जिन्दगी से गुजर न पाया-
अब नहीं है तू कही पर लगता है जैसे साथ हो तेरा साया-
सही कहा है तूने हा आज भी ये बिगड़ा सुधर न पाया-
तू ही था एक मेरा जो मेरा था पर हो न पाया,
बहोत आये तेरे जाने के बाद पर किसी को ये मिलन न मिल पाया.....
Posted on: Jan 31, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
छोटे-छोटे पत्थर चुनके हमने बनाया पहाड़, उसी पहाड़ पर चीटिया हजारों हजार...संगठन गीत
मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से साथी सुनील कुमार इस इस एक वक्त महिला स्व-सहायता समूह की एक बैठक में है और उनके साथ उपस्थित है देविका गिरी जो उनके समूह पर एक गीत सुना रहीं है :
छोटे-छोटे पत्थर चुनके हमने बनाया पहाड़, उसी पहाड़ पर चीटिया हजारों हजार-
समूह से अलग ना होंगे, समूह से अगल ना होंगे-
बुँदे-बुँदे पानी से भर जाते है तालाब, उसी तालाब में रहतें है मछलिया हजारो से हजार-
समूह से अलग ना होंगे, समूह से अगल ना होंगे...
Posted on: Jan 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कहाँ गया वो अचानक पता लगे उसका...ग़ज़ल
मालीघाट मुजफ़्फ़रपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गजल सुना रहे है:
कहाँ गया वो अचानक पता लगे उसका-
या कोई छाप या फिर नक्श ए पा मिले उसका-
मैं खामवाह उसे बेवफा समझता रहा-
वो दुनियादार हैं मौला भला करे उसका-
मैं चाहता हूं वहाँ बेघरो की बस्ती हो-
वो चाहता है मकबरा बने उसका-
मैं कैद ए जिद हूं मना ले कोई मना ले-
वो जा रहा हैं कोई रास्ता रोक ले उसका-
वो शख्स जिसने बनाए किले महल उसका-
वो दर ब दर कहीं आसरा बने उसका...

