हम बदले तो ये जन बदलेगा, ये जन बदले तो ये जगत बदलेगा...समूह गीत
ग्राम पंचायत-सालेभाट, तहसील-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कुंवरवती साहू और श्रीमती शांति यादव एक समूह गीत सुना रहे हैं :
हम बदले तो ये जन बदलेगा, ये जन बदले तो ये जगत बदलेगा-
ये लोग नही बदल रहे हैं करके नही सोचना-
पहले अपने लोग बदले तो अच्छा रहेगा-
मछली पकड़ के दिए तो नही बदलेगा-
इनको पकड़ना सिखाओ तो अच्छा रहेगा-
हम बदले तो ये जन बदलेगा ये जन बदले तो ये जगत बदलेगा...
Posted on: Jul 25, 2018. Tags: KANKER KUNWARWATI SAHU SANTI YADAV SONG VICTIMS REGISTER
इस जमाने में नारियो का झंडा ऊँचा उठाना है...महिला समूह गीत
ग्राम-सालेभाट, विकासखंड-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ) से शांति यादव, कुवरबती साहू, अनीता साहू और राधा यादव एक महिला समूह गीत सुना रहे है:
इस जमाने में नारियो का झंडा ऊँचा उठाना है-
ए दी तुम नारी हो तो हमारा साथ दो – चाहे तुम अमीर हो, चाहे तुम ग़रीब हो – ए दी तुम नारी हो तो हमारा साथ दो – इस जमाने में नारियो का झंडा ऊचा उठाना है...
Posted on: Jul 24, 2018. Tags: ANITA SHAU HINDI SONG KANKER KUWARBATI SAHU SHANTI YADAV SONG VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव का नाम सालेभाट कैसे पड़ा : एक गाँव की कहानी-
ग्राम पंचायत-सालेभाट, तहसील-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा के अंकित पडवार के साथ में आज सुखराम वट्टी (गाँव के पटेल) हैं जो उनको बता रहे है कि उनके गाँव का नाम सालेभाट कैसे पडा: ग्राम सालेभाट जो वनांचल के नजदीक प्रकृति की गोद में बसा एक ख़ूबसूरत गाँव है, जहाँ लगभग 900 लोग निवास करते हैं क्योंकि उनके गाँव में पहले के ज़माने से लेकर अभी तक साल के बहुत पेड है जिससे दरवाजे, टेबल, कुर्सी आदि बनाये जाते है. यह पेड़ यहां अधिक मात्रा में होता है, इसलिए उनके गाँव का नाम सालेभाट पड़ा |
Posted on: Jul 24, 2018. Tags: KANKER SONG SUKHRAM WATTI VICTIMS REGISTER
मैं खुद गोंडी सीखकर उन इलाकों में पढ़ाऊंगी जहां लोग अब गोंडी बोलना भूल गए हैं (गोंडी भाषा में)
ग्राम सरोना, तहसील-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से उत्तम आतला के साथ गाँव के गोंडी टीचर राम बाई कोरेटी हैं जो गोंडी शिक्षका के लिए ट्रेनिंग ले रही हैं और उसके बारे में जानकारी बता रही है. वे उनको बता रही हैं कि वो इसी जिले की ग्राम-लोह्त्तुर आमाबेडा की रहने वाली हैं वे अभी सरोना में आकर गोंडी भाषा सीख रही हैं उसके बाद सीख कर उत्तर छत्तीसगढ़ में सरगुजा में जा कर वहां के आदिवासियों लड़के लड़कियों को गोंडी भाषा सिखाएगी | वो बोल रही है कि उनके क्षेत्र में अब लोग गोंडी भाषा नहीं बोलते है तो यहाँ सीखने बाद वहां भी स्कूल में बच्चो को गोंडी में पढ़ाएगी जिससे हमारी भाषा को बचा सके| किसी समाज की अगर भाषा ख़त्म हो जाए तो वह समाज धीरे धीरे ख़त्म हो जाता है
Posted on: Jul 24, 2018. Tags: GONDI KANKER RAMBAI KURETI
निकुन लेवाय, लेवा तुन टंडीले...गोंडी गीत
ग्राम-लोह्त्तर, पंचायत-बोलंडी, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से शांति वट्टी, संतोषी गावडे और रामबाई कुरेटी एक गोंडी गीत सुना रहे है: इस गीत को कोलांग महोत्सव के समय गोटुल में गाया जाता है:
रे रे लोयो रे रेला रेला रे लोयो रे रेला-
निकुन लेवाय, लेवा तुन टंडीले-
किलोर वस्ताये कवर वसेताये-
सेंग जोड़-जोड़ लेयो रो जीवा उडिता-
बदिर बूम तोर वातोर नुनिले-
किलोर वस्ताये कवर वसेताये-
सेंग जोड़-जोड़ लेयो रो जीवा उडिता...



