जल जंगल जमीन मावा खेती खेती रो...गोंडी गीत-
नारनूर मंडल, जिला-आदिलाबाद (तेलंगाना) से मरबा पुरुषोत्तम गोंडी भाषा में जल जंगल जमीन पर एक गीत सुना रहे हैं :
जल जंगल जमीन मावा खेती – जल जंगल जमीन मावा खेती खेती रो –
ताल लासी लडे नीले मासे कुमराम भीमो रो-
तान साठी निमे लडेम आसी रो-
जोडन घाट जोडन घाट नाटे लोप मंजी-
गोर गरीब आधा रे आसी आसी रो तुर्रा टा वाजा नीमा किस-
तुर्रा टा वाजा नीमा किस रो-
जल जंगल जमीन मावा खेती – जल जंगल जमीन मावा खेती खेती रो...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: GONDI SONG MARAMA PURUSOTTAM TELANGANA
लिखी लिखी पतिया, पाठावे परदेशवा...विरह गीत-
ग्राम-कोट्या, विकासखंड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक विरह गीत सुना रहे है:
लिखी लिखी पातिया, लिखी लिखी पातिया-
लिखी लिखी पतिया, पाठावे परदेशवा-
अब घर आजा हो सजनवा-
महुहा कुचाई गईली आमा बौउराई गईली-
लिखी लिखी पतिया, पाठावे परदेशवा...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: CG MEWALAL DEVANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
चोला बाट भले हो मोती नाह गिरा गढ़ी रे...सरगुजिया कर्मा गीत-
ग्राम-नवापारा, पंचायत-बड़वार, तहसील, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से बुधराम और श्यामबिहारी एक कर्मा गीत सुना रहे हैं :
चोला बाट भले हो मोती नाह गिरा गढ़ी रे-
कोन तो बनावे ले कटरी गे गोती न गिरा तही रे-
पुरे नहा का लबारी दगा दे हो गोपी न गिरा गढ़ी रे-
कोन तो बनावे लरकरी कोंबे नार हिरा गढ़ी रे-
कोन तो बनावे बही लोहे के शिकारी हो-
मोती नहर हीरा कही रे...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: BUDHRAM SHYAMBIHARI SARGUJIYA KARMA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
मोही ले चलो अपने नगरिया अवध बिहारी सावरिया...भजन गीत-
ग्राम-कोल्हुआ, विकासखण्ड-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से हरीसिंह मरावी एक भजन गीत सुना रहे हैं :
मोही ले चलो अपने नगरिया अवध बिहारी सावरिया-
ओके अवध बिहारी ये सावरिया-
प्रभु राहो कुआँ खोदवा देना-
जलवा भरुगी अकेले जरा आ जाना-
प्रभु राहो में मंदिर बनवा देना पूजा करुगी अकेले जरा आ जाना-
मोही ले चलो नगरिया आवध बिहारी सावरिया...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: BALRAMPUR HARISINGH MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले...भजन गीत
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मंदाकनी मिश्रा एक भजन गीत सुना रही है:
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले – गोविन्द नाम ले कर मेरे प्राण तन से निकली-
श्री गंगा जी का तट हो यमुना का बंशी बट हो-
निरा साव लानी कट हो जब प्राण तन से निकली-
श्री बन्दा बन का थल हो मेरे मुख के तुलसी दल हो-
दिस नौ चरण का जल हो जब प्राण तन से निकली....

