ऊँची पहाड़ ऊँचा पेड़ नहीं वहां कोई माली...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
ऊँची पहाड़ ऊँचा पेड़ नहीं वहां कोई माली-
कुदरत उनकी रक्षा करे शेर भालू करे रखवाली-
फल फूल डेटा हमको लकड़ी भी भारी भारी-
हमारा वो सब शुभ चिंतक हैं नहीं चलाना उन पर आरी-
वे वर्षा करवाते हैं बादलों को बुलाकर-
वे जीवन बचाते हैं शुद्ध वायू हमें देकर...
Posted on: Apr 11, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
दया दृष्टि होगी तो मुझको बचा लो...गीत-
कमल विहार, रायपुर (छत्तीसगढ़) से टिकई दास धार एक गीत सुना रहे हैं:
कोई माता होंगे तो दूध पिला दो-
दया दृष्टी होगी तो मुझको बचा लो-
एक माँ ने मुझको जनम दिये हैं-
दो दिन न हुये मुझे फेंक दिये हैं-
उस माँ को मै मै नहीं जानती-
इसीलिये उसे माँ नहीं मानती-
ऐसे कुकरमी माँ को जेल में सडा दो-
दया दृष्टी होगी तो मुझको बचा लो...
Posted on: Apr 10, 2020. Tags: CG HD GANDHI RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
मेरे वन उपवन में इस जन जीवन में...गीत-
ग्राम-गारे, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से समीर सिदार एक गीत सुना रहे हैं:
मेरे वन उपवन में इस जन जीवन में-
कब होगा सबेरा-
मेरे राम जाने, मेरे राम जाने-
मैंने ये देखा है मैंने ये सोंचा है-
कान में भांवर गुनगुनाते हैं-
मेरे वन उपवन में इस जन जीवन में...
Posted on: Apr 10, 2020. Tags: CG RAIGARH SAMAY SIDAR SONG VICTIMS REGISTER
सड़क बनवाने को लेकर आश्वासन मिला लेकिन कोई कारवाही नहीं हुई...
रायपुर (छत्तीसगढ़) से साक्षी बता रही हैं उन्होंने सीजीनेट से एक सन्देश उठाया था जो सुकमा जिले से पेंदाकुर्ती गाँव से सड़क की समस्या को लेकर था सड़क नहीं होने से लोगो को दिक्कत होती है इस संबंध में उन्होंने शिकायत कर्ता से बात किया और जानकारी लिया उसके बाद सचिव से बात किये जिस पर सचिव काम कराने को लेकर आश्वासन दिये, उसके बाद दोबारा 5 मार्च को बात करने से पता चला उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है, उसके बाद 24 मार्च को संपर्क करने की कोशिश किया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया, इस प्रकार से उन्हें सही जानकारी नहीं मिली है गुमराह किया जा रहा है, लेकिन प्रयास जारी है|
Posted on: Apr 09, 2020. Tags: CG RAIPUR SAKSHI SONG STORY VICTIMS REGISTER
दाई दादा जैसे कुकुर काकर...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
दाई दादा जैसे कुकुर काकर-
सास ससुर दूध दही खाथे-
दाई दादा बर खोरो खटिया-
ओकर बर पलंग बिछाथे-
दाई दादा जैसे कुकुर काकर-
ये ओकय चुचुवाथे
